Edited By Tanuja,Updated: 03 Feb, 2026 11:41 AM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत इजराइल के मोशाव नेवातिम में 300 पौधे लगाए गए और यहूदी पर्यावरण पर्व ‘तू बिश्वात’ मनाया गया। भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने भारत-इजराइल की पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और लोगों...
International Desk: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत इजराइल के मोशाव नेवातिम में कम से कम 300 पौधे लगाए गए और पर्यावरणीय जागरुकता का पर्व तू बिश्वात भी मनाया गया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय दूतावास द्वारा इजराइल की गैर-लाभकारी संस्था केरेन कायमेट लेइजराइल और कृषि आधारित बस्ती मोशाव नेवातिम के सहयोग से किया गया था, जो भारत और इजराइल के बीच पर्यावरणीय स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी और लोगों के बीच संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। कार्यक्रम के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी।
From Roots to Relationships 🌱
Jointly celebrated the Jewish festival of ‘Tu Bishvat’ (New Year for Trees) and Indian Prime Minister Shri. Narendra Modi’s initiative of ‘Ek Ped Maa Ke Naam’ at Moshav Nevatim today.
‘Ek Ped Maa ke Naam’ at Moshav Nevatim 🇮🇱 brought children &… pic.twitter.com/JI47t4hi71
— India in Israel (@indemtel) February 2, 2026
इस अवसर पर इजराइल के पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय के महानिदेशक रामी रोजेन, इजराइल में भारत के राजदूत जेपी सिंह और बनेई शिमोन क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख निर ज़मीर उपस्थित रहे। तीनों ने भारत और इजराइल की पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। राजदूत जेपी सिंह ने कहा, ''तू बिश्वात और 'एक पेड़ मां के नाम' दोनों ही पहलें पेड़ों को सामुदायिक सहभागिता और सतत जीवनशैली के केंद्र में रखती हैं। ये साझा परंपराएं भारत और इज़राइल के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच मजबूत रिश्तों को दर्शाती हैं तथा यह रेखांकित करती हैं कि हमारे दोनों देश प्रकृति, समुदाय और साझा मूल्यों को कितना महत्व देते हैं।'' उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ये पेड़ भारत-इजराइल मित्रता के स्थायी प्रतीक बनेंगे और इस संबंध को आने वाली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाएंगे।
सम्मानित अतिथियों ने भारत-इजराइल की मजबूत रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की धरती माता की रक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया। रामी रोजेन ने कहा, ''आज का आयोजन इजराइल और भारत के घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक है। दोनों देश विशेष रूप से जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं। नवाचार की साझा आकांक्षा के साथ-साथ हम यह भी मानते हैं कि प्रकृति की रक्षा करना जीवन की रक्षा का अभिन्न हिस्सा है।'' मोशाव नेवातिम की स्थापना कोच्चि से आए भारतीय यहूदियों ने की थी और आज भी यहां उनकी विरासत जीवित है, जिसमें पारंपरिक कोचीन शैली में बना एक आराधनालय शामिल है। यहां भारत यहूदी विरासत केंद्र भी स्थित है, जो भारत के यहूदियों की परंपराओं और मूल्यों को संजोए हुए है।