Edited By Tanuja,Updated: 23 May, 2026 05:20 PM

डोनाल्ड ट्रंप की “Hello Greenland” पोस्ट के बाद ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। राजधानी Nuuk में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जबकि अमेरिकी अधिकारियों ने ग्रीनलैंड को भविष्य का बड़ा तेल और...
Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ग्रीनलैंड में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड की राजधानी नुक की तस्वीर के साथ लिखा, “Hello Greenland!” इसके बाद वहां अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी को लेकर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में हाल ही में अमेरिका के नए वाणिज्य दूतावास (Consulate) को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए। सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिका विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर उठाए हुए थे, जिन पर लिखा था, “हमें आपका पैसा नहीं चाहिए” और “Go Away” यानी “यहां से चले जाओ।”
President Trump posts on Truth Social:
Hello, Greenland! pic.twitter.com/LXvzceLY0V
— Donald J Trump Posts TruthSocial (@TruthTrumpPost) May 22, 2026
ग्रीनलैंड के लोगों का कहना है कि अमेरिका वहां जरूरत से ज्यादा दखल देने की कोशिश कर रहा है। कई लोगों को डर है कि अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए ग्रीनलैंड का इस्तेमाल करना चाहता है। अमेरिका के विशेष दूत Jeff Landry ने ग्रीनलैंड में नेताओं और कारोबारियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ग्रीनलैंड सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक विकास पर साथ काम करना चाहते हैं। जेफ लैंड्री ने दावा किया कि ग्रीनलैंड भविष्य में बड़ा तेल उत्पादक बन सकता है।
#BREAKING🚨Protesters in Greenland outside the U.S. Embassy chanting:
GO HOME USA! GO HOME USA!
America is no longer respected on the world stage.
Trump has made the United States a national embarrassment on the world stage. pic.twitter.com/oQKULK7PsV
— IT’S TIME FOR JUSTICE (@LiddleSavages) May 23, 2026
उनके अनुसार यहां से रोज करीब 20 लाख बैरल तेल निकाला जा सकता है। उनका कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव कम होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता भी घट सकती है। Donald Trump पहले भी ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बता चुके हैं। उनका मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की मजबूत मौजूदगी भविष्य की सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी है। हालांकि ग्रीनलैंड में बढ़ते विरोध से साफ है कि वहां के कई लोग अमेरिका की सक्रियता को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मान रहे हैं।