Japan और China में लंच के बाद बच्चों को मिलता है 'Sleeping Break', जानें क्या हैं इसके फायदे?

Edited By Updated: 09 May, 2026 03:20 PM

in japan and china children sleep with sheets and pillows after lunch

क्या आपने कभी सोचा है कि क्लास में सो जाने पर टीचर आपको डांटने के बजाय आराम से सोने दे? जापान और चीन जैसे देशों में यह कोई सपना नहीं बल्कि हकीकत है। यहां के एजुकेशन सिस्टम में बच्चों की नींद को सजा नहीं बल्कि सफलता की चाबी माना जाता है। लंच के बाद...

School Sleep Break Japan China : क्या आपने कभी सोचा है कि क्लास में सो जाने पर टीचर आपको डांटने के बजाय आराम से सोने दे? जापान और चीन जैसे देशों में यह कोई सपना नहीं बल्कि हकीकत है। यहां के एजुकेशन सिस्टम में बच्चों की नींद को सजा नहीं बल्कि सफलता की चाबी माना जाता है। लंच के बाद मिलने वाली यह छोटी सी झपकी बच्चों के दिमाग को किसी सुपर कंप्यूटर की तरह रिचार्ज कर देती है।

जापान में नींद को लेकर एक बहुत ही अनोखी सोच है। यहां के कई स्कूलों और कॉलेजों में लंच के बाद 20 से 40 मिनट का 'पावर नैप' (Power Nap) ब्रेक दिया जाता है। अगर कोई बच्चा क्लास के दौरान सो जाता है तो टीचर उसे डांटकर जगाते नहीं हैं। इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि बच्चा बहुत मेहनत कर रहा है और थक गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ब्रेक से बच्चों की थकान मिटती है और वे अगले पीरियड में ज्यादा फोकस के साथ पढ़ाई कर पाते हैं।

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चीन में होते हैं विशेष Folding Desk

चीन के स्कूलों की व्यवस्था तो और भी एडवांस है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बताते हैं कि वहां स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष फोल्डिंग डेस्क होते हैं। लंच के बाद बच्चे अपनी डेस्क को ही बेड की शक्ल दे देते हैं। बच्चे घर से अपना तकिया और चादर लेकर आते हैं ताकि स्कूल में ही सुकून की नींद ले सकें। चीन में माना जाता है कि दोपहर की नींद बच्चों के मूड को बेहतर बनाती है और उनकी याददाश्त (Memory) तेज करती है।

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यह हैं 'स्लीप ब्रेक' देने के पीछे का ठोस कारण

वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के अनुसार स्कूल में 'स्लीप ब्रेक' देने के पीछे ठोस कारण हैं:

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बेहतर फोकस: नींद के बाद दिमाग तरोताजा हो जाता है जिससे कठिन विषयों को समझना आसान होता है।

तनाव कम होना: पढ़ाई का बोझ बच्चों पर हावी नहीं होता और वे स्कूल को एक खुशी वाली जगह मानने लगते हैं।

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आत्मनिर्भरता: जापान में बच्चे अपनी नींद और समय का प्रबंधन खुद करते हैं, जिससे उनमें अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है।

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जानें क्या भारत में भी बदलेंगे नियम?

भारत में फिलहाल स्कूलों में सोने की व्यवस्था नहीं है लेकिन बाल मनोवैज्ञानिकों (Child Psychologists) का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए यह सिस्टम वरदान साबित हो सकता है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भारी स्कूल बैग के बीच थोड़ी देर का विश्राम भारतीय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को काफी हद तक सुधार सकता है।

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