Edited By Pardeep,Updated: 16 Aug, 2026 10:49 PM

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जारी तनाव के बीच ईरानी सेना ने एक बड़ा ऐलान किया है। सेना के मुताबिक, हमलावर अमेरिकी मिलिट्री के किसी भी सैनिक को जिंदा पकड़ने या मारने पर 30,000 डॉलर (लगभग 5 बिलियन तोमन) के बराबर का इनाम दिया जाएगा।
इंटरनेशनल डेस्कः पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जारी तनाव के बीच ईरानी सेना ने एक बड़ा ऐलान किया है। सेना के मुताबिक, हमलावर अमेरिकी मिलिट्री के किसी भी सैनिक को जिंदा पकड़ने या मारने पर 30,000 डॉलर (लगभग 5 बिलियन तोमन) के बराबर का इनाम दिया जाएगा। सेना प्रमुख आमिर हतामी ने यह भी घोषणा की है कि अगर इस कार्रवाई को कोई हिम्मत वाली ईरानी महिला अंजाम देती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।
जनता के अनुरोध पर तैयार की गई योजना
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, देश के आर्मी चीफ आमिर हतामी ने बताया कि वित्तीय मदद में योगदान देने के लिए बड़ी संख्या में जनता के अनुरोध प्राप्त होने के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया गया। हालांकि, हतामी ने अमेरिकी सैनिकों को कहां या कब निशाना बनाया जाएगा, इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। गौरतलब है कि इस युद्ध के दौरान अप्रैल में एक मृत अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू मिशन को छोड़कर, ईरान में अमेरिका की कोई जमीनी सेना (ग्राउंड फोर्स) तैनात नहीं की गई है।
28 फरवरी को भड़की थी युद्ध की चिंगारी
अमेरिका और ईरान के बीच यह भीषण संघर्ष इस साल 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इजराइल की बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के साथ मिलकर तेहरान और देश के कई अन्य हिस्सों पर हमले किए थे। इस युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और पड़ोसी अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ताबड़तोड़ हमले किए।
होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से वैश्विक अर्थव्यवस्था बेपटरी
संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना किसी भी शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है, जो दुनिया का एक ऐसा महत्वपूर्ण मार्ग है जिससे वैश्विक स्तर पर करीब पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है. इस नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतें आसमान छू गई हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
शांति समझौते के प्रयास भी रहे बेअसर
शुरुआती भीषण संघर्ष के बाद अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता से लगभग 40 दिनों की जंग के बाद सीजफायर (युद्धविराम) हुआ था। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक रूपरेखा भी बनी थी, लेकिन वह समझौता बाद में टूट गया। तब से दोनों सेनाओं के बीच दक्षिणी ईरान और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास छिटपुट गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं। इस बीच यमन के हूती बागियों द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए हमलों ने लाल सागर के मार्ग पर भी नेविगेशन को बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक संकट और भी अधिक जटिल हो गया है।