Edited By Tanuja,Updated: 03 Aug, 2026 03:33 PM

ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए कथित जासूसी करने के दोषी दो लोगों, ओमिद बेहजाद और पौरिया सफवत, को फांसी दे दी। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि दोनों ने सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारी साझा की थी। मानवाधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई पर...
International Desk: ईरान ने सोमवार को इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) के लिए कथित तौर पर जासूसी करने के दोषी ठहराए गए दो लोगों को फांसी दे दी। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने हालिया सैन्य संघर्षों के दौरान देश के संवेदनशील सैन्य और सुरक्षा ठिकानों की जानकारी इजरायली खुफिया एजेंसी तक पहुंचाई थी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मृत्युदंड पाने वालों की पहचान ओमिद बेहजाद (Omid Behzad) और पौरिया सफवत (Pouria Safvat) के रूप में हुई है। अधिकारियों का दावा है कि दोनों ने जून में ईरान-इजरायल के बीच हुए 12 दिवसीय युद्ध और तथाकथित "रमजान युद्ध" के दौरान मोसाद के लिए काम किया।
नॉर्वे स्थित संगठन Iran Human Rights के अनुसार, वर्ष 2025 में ईरान में लगभग 1,500 लोगों को फांसी दी गई, जिसे संगठन ने मृत्युदंड के इस्तेमाल में अभूतपूर्व वृद्धि बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आरोपियों ने सैन्य और सुरक्षा केंद्रों की तस्वीरें, सटीक भौगोलिक निर्देशांक (GPS लोकेशन) और अन्य संवेदनशील जानकारी मोसाद से जुड़े संपर्कों को भेजी, जिससे इन ठिकानों पर हमले करने में मदद मिली। जांच के दौरान कथित तौर पर दोनों और इजरायली एजेंटों के बीच हुई बातचीत और संदेशों को भी सबूत के तौर पर पेश किया गया। फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि एक संदेश में आरोपी ने लिखा था कि उसके पास सैन्य केंद्र से ड्रोन या लड़ाकू विमान पर फायरिंग का वीडियो भी है, लेकिन कमजोर इंटरनेट के कारण वह उसे भेज नहीं पा रहा।
इससे पहले जनवरी 2026 में भी ईरान ने अली अर्देस्तानी नामक व्यक्ति को मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी दी थी। ईरानी मीडिया के अनुसार, उसने कथित रूप से गोपनीय सूचनाएं और संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें धन और अन्य लाभ के बदले इजरायल को उपलब्ध कराई थीं। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और कई पश्चिमी देशों ने ईरान में जासूसी और राजनीतिक मामलों में दी जाने वाली मृत्युदंड की सजा पर लगातार चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कई मामलों में आरोपियों से जबरन स्वीकारोक्ति कराई जाती है और मुकदमों में पारदर्शिता की कमी रहती है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि जिन लोगों को फांसी दी गई, वे दुश्मन देशों की खुफिया एजेंसियों के लिए काम कर रहे थे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा थे।