Edited By Tanuja,Updated: 16 Jun, 2026 03:51 PM

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि ईरान-इजराइल युद्ध की समाप्ति का अर्थ केवल संघर्ष विराम नहीं, बल्कि दक्षिणी लेबनान से इजराइली कब्जे का अंत भी होना चाहिए। उन्होंने इसे अमेरिका-ईरान समझौते की भावना से भी जोड़ा है।
International Desk: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को कहा कि ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की समाप्ति का मतलब केवल सैन्य संघर्ष का रुकना नहीं है, बल्कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सैन्य उपस्थिति और कब्जे का अंत भी होना चाहिए। ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अराघची ने विदेशी राजनयिकों के साथ बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। हालांकि, उनके बयान का वीडियो प्रसारित नहीं किया गया, बल्कि इसे स्क्रीन पर लिखित संदेश के रूप में दिखाया गया।
लेबनान पर ईरान की आपत्ति
अराघची ने कहा कि दक्षिणी Lebanon में इजराइली सैन्य मौजूदगी जारी रहना स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, यदि युद्ध समाप्त हो चुका है तो क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कब्जा या सैन्य नियंत्रण भी समाप्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि लेबनान में इजराइल की मौजूदगी अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) की भावना के विपरीत होगी।
समझौते की शर्तें अब भी स्पष्ट नहीं
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस कारण यह स्पष्ट नहीं है कि उसमें लेबनान, क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था या इजराइली सैन्य गतिविधियों से संबंधित कोई विशेष प्रावधान शामिल हैं या नहीं।
मध्य पूर्व में नए विवाद के संकेत
अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत कई देशों ने किया है और क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन लेबनान में इजराइल की भूमिका को लेकर ईरान की नई टिप्पणी संकेत देती है कि युद्धविराम के बाद भी कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद बने रह सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिणी लेबनान और वहां सक्रिय Hezbollah से जुड़े मुद्दे भविष्य में भी क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा चर्चाओं के केंद्र में रह सकते हैं।