Edited By Tanuja,Updated: 16 Sep, 2026 11:27 AM

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान को ‘निहत्था’ बताए जाने वाले अमेरिकी दावों पर पलटवार किया है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें ईरानी हमलों से आठ देशों में अमेरिकी ठिकानों की सैकड़ों इमारतों को नुकसान और दर्जनों...
Tehran: ईरान को लेकर अमेरिकी दावों के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर पलटवार किया है। अराघची ने अमेरिकी रक्षा विभाग के निरीक्षक की नई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ईरान को ‘निहत्था और बेबस ’ बताना वास्तविकता से अलग है। अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों से मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैकड़ों इमारतों और ढांचों को नुकसान पहुंचा या वे नष्ट हुए, जबकि दर्जनों अमेरिकी विमान और ड्रोन भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी दावे का मजाक उड़ाते हुए लिखा कि “ईरान निहत्था है” कहना काल्पनिक बात है, जबकि जंग की असली तस्वीर अळग ही है। खुद अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को हुए नुकसान और हथियारों की कमी का विवरण सामने आया है।
अराघची ने अमेरिकी नुकसान को “हिमखंड की सिर्फ चोटी” बताया और संकेत दिया कि उनके मुताबिक युद्ध में ईरान द्वारा अमेरिका को पहुंचाए गए नुकसान की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। यह बयान अराघची का राजनीतिक दावा है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग के निरीक्षक की रिपोर्ट में अमेरिकी ठिकानों और सैन्य विमानों को हुए नुकसान की पुष्टि की गई है।अमेरिकी रक्षा विभाग के निरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी हमलों ने कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों इमारतों और अन्य ढांचों को नुकसान पहुंचाया या नष्ट किया।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा। चार देशों में अमेरिकी राजनयिक परिसरों को हुए नुकसान का अनुमान करीब 18.4 करोड़ डॉलर लगाया गया है। रिपोर्ट में अमेरिकी विमानों को हुए नुकसान का भी विवरण दिया गया है।
इसमें कई मानवयुक्त विमान और ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान में चार एफ-15ई लड़ाकू विमान, एक ए-10, कई हेलीकॉप्टर, एक एमक्यू-4सी ड्रोन और 30 तक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं। सात केसी-135 ईंधन भरने वाले विमानों को भी नुकसान पहुंचने या नष्ट होने की जानकारी दी गई है। ईरानी हमलों का असर बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक ढांचे पर भी पड़ा। यह क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना का महत्वपूर्ण रसद केंद्र था। रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड को वैकल्पिक रसद केंद्रों की ओर आपूर्ति व्यवस्था मोड़नी पड़ी। इस बदलाव के कारण हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया जैसे दूर के ठिकानों पर निर्भरता बढ़ी और मध्य पूर्व में अमेरिकी अभियानों के लिए रसद चक्र लंबा हो गया।
अमेरिकी रक्षा विभाग के निरीक्षक की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हथियारों के भंडार से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान बड़े पैमाने पर गोला-बारूद और मिसाइलों के इस्तेमाल से अमेरिकी सैन्य भंडार में रणनीतिक कमी पैदा हुई और हथियारों की दोबारा आपूर्ति करने वाली रक्षा औद्योगिक व्यवस्था में कई अड़चनें सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से 30 जून तक इस अभियान की अनुमानित लागत 33.4 अरब डॉलर रही, जिसमें करीब 22.3 अरब डॉलर सिर्फ हथियारों और गोला-बारूद पर खर्च हुए। युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई से हुई थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की रक्षा क्षमता, नेतृत्व, नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है।