Edited By Tanuja,Updated: 20 Jun, 2026 06:51 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni पर नया हमला बोलते हुए दावा किया कि उन्होंने G7 सम्मेलन में बार-बार फोटो खिंचवाने का अनुरोध किया था और ईरान मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं दिया। मेलोनी ने इन आरोपों...
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए बार-बार आग्रह किया था और अब वह अपनी राजनीतिक लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ नजदीकी दिखाना चाहती हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि इटली ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अमेरिकी प्रयासों में पूरा सहयोग नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इटली ने अमेरिकी विमानों को अपने रनवे और हवाई अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी, जिससे सैन्य और लॉजिस्टिक चुनौतियां पैदा हुईं। ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका यूरोप की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन बदले में उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता।
मेलोनी ने आरोपों को बताया ‘मनगढ़ंत’
ट्रंप के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मेलोनी ने कहा कि यह कहानी पूरी तरह गढ़ी गई है। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने और न ही इटली ने कभी किसी से "भीख" मांगी है। मेलोनी ने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका का राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है। ट्रंप की टिप्पणियों के बाद इटली में राजनीतिक हलकों में नाराजगी देखी गई। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा रद्द कर दी और इन बयानों को पूरे इटली का अपमान बताया। कई राजनीतिक दलों ने भी मेलोनी के समर्थन में आवाज उठाई।
ट्रंप और मेलोनी को लंबे समय तक वैचारिक सहयोगी माना जाता रहा है। लेकिन ईरान, मध्य-पूर्व नीति और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेदों ने दोनों नेताओं के रिश्तों में खटास ला दी है। दिलचस्प बात यह है कि G7 सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से रिश्ते सामान्य होने के संकेत दिए थे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह विवाद सामने आ गया। विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप के हालिया बयान केवल व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं हैं, बल्कि वे NATO सहयोगियों पर दबाव बनाने, ईरान नीति पर अपनी नाराजगी जताने और यूरोपीय नेताओं को घरेलू राजनीति के संदर्भ में चुनौती देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी माने जा रहे हैं।