Edited By Pardeep,Updated: 02 Apr, 2026 05:55 AM

करीब आधी सदी के लंबे इंतजार के बाद इंसान ने एक बार फिर गहरे अंतरिक्ष और चंद्रमा की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने गुरुवार तड़के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से अपने ऐतिहासिक आर्टेमिस-II (Artemis-II) मिशन को...
इंटरनेशनल डेस्कः करीब आधी सदी के लंबे इंतजार के बाद इंसान ने एक बार फिर गहरे अंतरिक्ष और चंद्रमा की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने गुरुवार तड़के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से अपने ऐतिहासिक आर्टेमिस-II (Artemis-II) मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन के जरिए चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों की चंद्रमा की यात्रा पर रवाना हुए हैं।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट ने भरी हुंकार भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के 3:54 बजे दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ने अंतरिक्ष यात्रियों से भरे ओरियन (Orion) कैप्सूल के साथ उड़ान भरी। साल 1972 के बाद यह पहली बार है जब कोई मानव मिशन चंद्रमा के इतने करीब जा रहा है।
पहली बार महिला और अश्वेत यात्री रचेंगे इतिहास इस मिशन की सबसे खास बात इसकी विविधता है। आर्टेमिस-II के चालक दल में पहली बार ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिले हैं:
- क्रिस्टीना कोच: चंद्रमा की यात्रा करने वाली दुनिया की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनेंगी।
- विक्टर ग्लोवर: मिशन के पायलट के रूप में चंद्रमा पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे।
- जेरेमी हैनसन: कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के यह यात्री चंद्रमा के मिशन पर जाने वाले पहले गैर-नासा यात्री हैं।
- रीड वाइसमैन: इस ऐतिहासिक दल की कमान मिशन कमांडर के रूप में संभाल रहे हैं।
10 दिनों का सफर, परिक्रमा कर लौटेंगे वापस यह 10 दिवसीय यात्रा अंतरिक्ष विज्ञान के लिए मील का पत्थर साबित होगी। ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के चारों ओर 'फिगर 8' (अंग्रेजी के 8 अंक) जैसी आकृति में चक्कर लगाएगा और चंद्रमा के दूसरी तरफ (Far Side) से होकर गुजरेगा। हालांकि, यह दल चंद्रमा की सतह पर उतरेगा नहीं, बल्कि उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग कर वापस पृथ्वी की ओर लौटेगा।
मंगल मिशन की ओर पहला कदम नासा के अनुसार, आर्टेमिस-II मिशन केवल चंद्रमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के मंगल मिशनों के लिए एक परीक्षण है। इस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री गहरे अंतरिक्ष में रेडिएशन, लंबी दूरी के संचार और लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच करेंगे। लॉन्च के पहले दिन यात्री ओरियन कैप्सूल के भीतर अपनी जरूरतों के अनुसार सिस्टम सेट करेंगे और अंतरिक्ष के वातावरण के साथ तालमेल बिठाएंगे।
यह सफल लॉन्च न केवल तकनीक की जीत है, बल्कि यह संदेश भी है कि अब अंतरिक्ष की खोज किसी जाति, लिंग या देश तक सीमित नहीं है।