Edited By Pardeep,Updated: 19 Oct, 2026 11:26 PM

फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के गहराते संकट के ख़िलाफ़ जारी जनाक्रोश ने भीषण हिंसक रूप ले लिया है।
पेरिस: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के गहराते संकट के खिलाफ जारी जनाक्रोश ने भीषण हिंसक रूप ले लिया है। सप्ताहांत में भड़की अभूतपूर्व हिंसा, आगजनी और दुकानों में हुई भारी लूटपाट के बाद फ्रांस सरकार ने पेरिस और लिल सहित उत्तर के चार प्रमुख शहरों में सोमवार और मंगलवार को रात 8:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू करने की घोषणा की है।
पेरिस में प्रदर्शनों पर रोक, बंद करना पड़ा ऐतिहासिक लुव्र म्यूज़ियम
सुरक्षा स्थिति को देखते हुए राजधानी पेरिस में सोमवार रात से प्रदर्शनों पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि दक्षिणी शहर मार्सिले में दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक सार्वजनिक सभाओं पर पूर्ण रोक लगा दी गई है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने दुनिया के सबसे प्रसिद्ध लुव्र म्यूज़ियम (Louvre Museum) के प्रवेश द्वार पर नाकाबंदी कर दी। इसके चलते म्यूज़ियम के प्रसिद्ध ग्लास पिरामिड के बाहर अफरा-तफरी मच गई और पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए म्यूज़ियम को बंद करना पड़ा।
3,000 दुकानों में लूटपाट, सैकड़ों मिलियन यूरो का नुकसान
बीते शनिवार को महंगाई के खिलाफ फ्रांस भर में लगभग 5 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे इस आंदोलन में जल्द ही नकाबपोश उपद्रवियों ने हिंसा भड़का दी। उपद्रवियों ने सरकारी भवनों व टाउन हॉल पर हमले किए, गाड़ियों में आग लगाई और जमकर लूटपाट की। लघु उद्योग मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 3,000 दुकानों को निशाना बनाया गया, जिससे सैकड़ों मिलियन यूरो का नुकसान हुआ है। लूट का सामान ऑनलाइन बेचने से रोकने के लिए डिजिटल मंत्रालय ने Vinted, eBay, Amazon, Meta और TikTok जैसी कंपनियों को ऐसे विज्ञापनों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है।
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने स्वीकार किया कि उपद्रव के दौरान पुलिस का नियंत्रण छूट गया था, जिसके बाद उन्होंने अपने इस्तीफ़े की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। हिंसा में 2,500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और करीब 1,000 सुरक्षा बल के जवान घायल हुए हैं। एक प्रदर्शनकारी का हाथ ग्रेनेड से उड़ जाने की भी सूचना है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्होंने देश में आपातकाल (State of Emergency) लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया है।
महंगाई से सुलग रहा है फ़्रांस, राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले संकट
फ्रांस में मार्च के बाद से डीजल की कीमतों में 40% और पेट्रोल में 25% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि बीते 5 वर्षों में खाद्य पदार्थ 25% महंगे हो चुके हैं। आगामी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक छह महीने पहले भड़की इस हिंसा ने मैक्रों सरकार के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
पूरे यूरोप में फैल रही है अशांति
महंगाई की यह आग फ्रांस तक सीमित नहीं है। इटली के मिलान में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जबकि बेल्जियम के ब्रसेल्स व लीज में पुलिस को अश्रु गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। वहीं स्पेन के मैड्रिड और पुर्तगाल के लिस्बन में भी महंगे आवास के ख़िलाफ़ लोगों ने पक्के मोर्चे लगा दिए हैं। जर्मनी, चीन और यूरोपीय संघ ने फ्रांस में अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।