हिंसक दंगों की आग में जल रहा यूरोपः 6 देशों में महंगाई और बेरोजगारी पर बवाल; फ्रांस से बेल्जियम तक सड़कों पर लोग, इटली में स्कूलों पर कब्जा

Edited By Updated: 20 Oct, 2026 11:51 AM

why europe countries hit by protests

यूरोप के छह देशों फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन, ग्रीस और बेल्जियम में महंगाई, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और आवास संकट के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए हैं। फ्रांस और अल्बानिया में आगजनी व हिंसा हुई, इटली में छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा किया, जबकि ग्रीस में...

Paris: यूरोप के छह देशों में सरकारों के खिलाफ जनआक्रोश तेज हो गया है। फ्रांस में प्रदर्शन आगजनी और लूटपाट तक पहुंच गए, अल्बानिया में सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया गया और इटली में छात्रों ने स्कूलों पर कब्जा किया। वहीं, ग्रीस में छात्र संसद के बाहर तंबू लगाकर बैठे हैं। बेल्जियम और स्पेन में भी सरकार की नीतियों और आवास संकट के खिलाफ विरोध तेज है। इन आंदोलनों में छात्रों के साथ कर्मचारी, श्रमिक संगठन और आम नागरिक भी शामिल हैं।


यूरोप के 6 देशों में क्यों भड़का आंदोलन?
यूरोप के अलग-अलग देशों में विरोध की वजहें भले ही अलग हैं, लेकिन इनके केंद्र में आम लोगों की बढ़ती आर्थिक मुश्किलें हैं। महंगाई के मुकाबले कम आय, महंगे किराये, बेरोजगारी, शिक्षा पर बढ़ता खर्च और सरकारी सुविधाओं में कटौती को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। कई जगह शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक झड़पों में बदल गए हैं।

 

फ्रांस में विरोध की वजह
17 अक्टूबर को फ्रांस के करीब 140 शहरों में प्रदर्शन हुए। उपलब्ध खबर के मुताबिक, लगभग आठ लाख लोग सड़कों पर उतरे। इनमें छात्र संगठनों के साथ श्रमिक संघों और कर्मचारियों ने भी भाग लिया। पेरिस, मार्सेई और बोर्डो सहित कई शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें आईं। लीमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने और कई वाहनों को जलाए जाने की सूचना मिली। 18 अक्टूबर तक करीब 1,800 लोगों की गिरफ्तारी की खबर थी। 500 से अधिक पुलिसकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और दमकलकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा की। सरकार का कहना है कि कुछ हिंसक समूहों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का फायदा उठाया। हिंसा रोकने के लिए कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
 

अल्बानिया में  सरकारी कार्यालयों में आग
अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा के खिलाफ कई महीनों से विरोध चल रहा है। शुरुआत में दक्षिणी तट पर प्रस्तावित एक आलीशान पर्यटन परियोजना को लेकर सवाल उठे थे। यह परियोजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी बताई गई है। विरोध करने वालों ने पर्यावरणीय नुकसान और फैसलों में पारदर्शिता की कमी की आशंका जताई। बाद में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और युवाओं की समस्याएं भी आंदोलन का हिस्सा बन गईं। 13 अक्टूबर को राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए। छात्रों ने विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति और महंगी फीस के खिलाफ भी आवाज उठाई। 17 अक्टूबर को प्रदर्शन हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, पेट्रोल बम और धातु की वस्तुएं फेंकीं। वाहनों और कूड़ेदानों में आग लगाई गई तथा सड़कों को अवरुद्ध किया गया। खबर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के कुछ कार्यालयों, बैंकों और डाकघर की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। पहली बार रबर की गोलियां चलाए जाने की भी खबर आई।

 

 इटली में परेशान छात्र, स्कूलों पर कब्जा 
इटली में बढ़ते खर्च और शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन कमाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही। महंगे मकानों और किराये ने भी युवाओं तथा कम आय वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 17 अक्टूबर को मिलान में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। कुछ नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकीं। दुकानों के शीशे तोड़े गए, सामान लूटने और सड़क पर मेज-कुर्सियां रकर रास्ता रोकने की घटनाएं हुईं। कुछ जगह आगजनी भी की गई। छात्रों ने कई स्कूलों पर कब्जा कर लिया। शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर 30 अक्टूबर को हड़ताल का ऐलान किए जाने की भी खबर है। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन शहरों में हिंसा फैलाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने हालात पर चर्चा के लिए सरकार की बैठक भी बुलाई।

 

स्पेन में विरोध क्यो?
स्पेन में आवास संकट के खिलाफ विरोध तेज हुआ है। किरायेदारों का कहना है कि मकानों के बढ़ते किराये और निवेशकों की नीतियों के कारण आम लोगों के लिए घर में रहना मुश्किल होता जा रहा है। 87 वर्षीय मारिकार्मेन अबास्कल को मैड्रिड में उस घर से निकाले जाने की खबर ने लोगों में गुस्सा बढ़ाया, जहां वह करीब 70 वर्षों से रह रही थीं। खबर के अनुसार, मकान खरीदने वाले निवेश कोष ने उनका किराया 230 प्रतिशत बढ़ाने की मांग की थी। वह इतनी रकम नहीं चुका सकीं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। 3 अक्टूबर को मैड्रिड सहित स्पेन के 50 से अधिक शहरों में हजारों लोग प्रदर्शन के लिए निकले। उन्होंने किराया कम करने, बेदखली पर रोक लगाने और किरायेदारों के अधिकार मजबूत करने की मांग की। आवास संकट से जुड़ा यह आंदोलन अब व्यापक सामाजिक बहस का विषय बन गया है। हालांकि, दिए गए समाचार में चुनाव की तारीख और इस आंदोलन के बीच बताए गए संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।


 
ग्रीस में संसद के बाहर तंबू  
ग्रीस में छात्र आवास संकट को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि किराया, बिजली, भोजन और आने-जाने का खर्च इतना बढ़ गया है कि पढ़ाई जारी रखना कठिन हो रहा है। 13 अक्टूबर को एथेंस के सिंटाग्मा चौक में छात्रों ने संसद के सामने तंबू लगा दिए। भारी बारिश के बावजूद वे वहीं डटे रहे। उनकी मांग है कि सरकार सस्ते छात्रावास बनाए और रहने के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाए। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देती, वे अपना विरोध जारी रखेंगे। यह आंदोलन केवल महंगाई के खिलाफ नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा तक पहुंच और छात्रों की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा है।

 
बेल्जियम में कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव
बेल्जियम में छात्र और श्रमिक संगठन अलग-अलग मुद्दों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्र शिक्षा से जुड़े बदलावों और संभावित कटौतियों का विरोध कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि इनसे पढ़ाई महंगी होगी और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना मुश्किल हो सकता है। 1 अक्टूबर को फ्रेंच भाषी इलाके में शिक्षा संबंधी बदलावों के खिलाफ विरोध शुरू हुआ। इसके बाद 9 अक्टूबर को दो बड़े श्रमिक संगठनों ने सरकार की बजट योजनाओं के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया। श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकारी खर्च घटाने की नीतियों का असर कर्मचारियों, पेंशन पाने वालों और कम आय वाले परिवारों पर पड़ेगा। वेतन वृद्धि, करों और काम के घंटों से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी नाराजगी है। 9 अक्टूबर के बाद कई मौकों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। ब्रुसेल्स में 12 और 17 अक्टूबर को भी टकराव की खबरें आईं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और वाहनों में आग लगाई।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!