ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में PAK की एंट्री से बवाल, पाकिस्तानी बोले-'PM शहबाज की बूट पॉलिश आदत ने फिर शर्मसार किया’

Edited By Updated: 22 Jan, 2026 06:27 PM

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ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान के शामिल होने के फैसले पर देश में तीखा विरोध शुरू हो गया है। पूर्व राजनयिक, नेता और बुद्धिजीवी इसे ट्रंप का निजी एजेंडा बता रहे हैं और इजरायल के साथ मंच साझा करने को फिलिस्तीन से गद्दारी कह रहे हैं।

International Desk: पाकिस्तान द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के फैसले ने देश के भीतर राजनीतिक और बौद्धिक तूफान खड़ा कर दिया है। जहां प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है, वहीं पूर्व राजनयिकों, पत्रकारों, वकीलों और बुद्धिजीवियों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान गाजा में शांति की हर कोशिश का हिस्सा बनना चाहता है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह शांति नहीं, बल्कि ट्रंप की खुशामद है।

 

मलीहा लोधी का तीखा हमला
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने इस फैसले को बेहद गलत बताया। उन्होंने कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ट्रंप का निजी प्रोजेक्ट है, जिसे वह संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनका सवाल था “क्या ट्रंप को खुश करना, सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा अहम हो गया है?”उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक ऐसे बोर्ड में शामिल हो रहा है, जिसमें इजरायल भी शामिल है, जबकि पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता तक नहीं दी है।गाजा पर इजरायली हमलों से जुड़ी खबर साझा करते हुए मलीहा लोधी ने तंज कसा-“क्या यही वह शांति है, जिसे बोर्ड ऑफ पीस बढ़ावा देगा?”

 

‘शहबाज की बूट-पॉलिश की आदत…’
पाकिस्तान के पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने बेहद तीखी भाषा में सरकार पर हमला बोला। उन्होंने लिखा-“ट्रंप को खुश करने के लिए युद्ध अपराधों के आरोपी नेतन्याहू के साथ मंच साझा करना, फिलिस्तीनी मुद्दे से खुली गद्दारी है। शहबाज शरीफ की बूट-पॉलिश की आदत ने पाकिस्तान को कहां से कहां पहुंचा दिया है।” पाकिस्तानी पत्रकार बकीर सज्जाद ने लिखा कि यह शांति नहीं, बल्कि मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंडी राजनीति है। पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर ने कहा कि यह फैसला बिना संसद और जनता से पूछे लिया गया, जो लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को औपनिवेशिक प्रोजेक्ट बताते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के समानांतर ढांचा है। ट्रंप को इसमें असाधारण ताकत मिलेगी। स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर की फीस इसे “अमीरों का क्लब” बनाती है। 

 

दावोस में साइनिंग, जनता का गुस्सा
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार दावोस पहुंच चुके हैं और साइनिंग सेरेमनी की तस्वीरें सामने आई हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। कई यूजर्स ने लिखा “लानत है तुम लोगों पर।” पूर्व सैनिक बताने वाले एक यूजर ने सवाल उठाया-“क्या नेतन्याहू जैसे युद्ध अपराधों के आरोपी के साथ मंच साझा करना पाकिस्तान की नैतिकता से मेल खाता है?” कुल मिलाकर, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच से ज्यादा, घरेलू राजनीति में बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है।
 

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