324 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल... ईरान-इजरायल युद्ध का असर पाकिस्तान पर भारी, जनता का शहबाज सरकार पर फूटा गुस्सा

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 08:26 PM

iran israel war has had a huge impact on pakistan

मिडिल ईस्ट में चल रहे Iran–Israel conflict का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 320 रुपये प्रति लीटर से भी ऊपर पहुंच गई है। बढ़ती महंगाई...

इंटरनेशनल डेस्क : मिडिल ईस्ट में चल रहे Iran–Israel conflict का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 320 रुपये प्रति लीटर से भी ऊपर पहुंच गई है। बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन के दामों में यह तेज उछाल आम लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। कई शहरों में लोग सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

कराची में लोगों ने सरकार की तैयारी पर उठाए सवाल

Karachi के निवासी असलम कादरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार को पहले से अंदाजा होना चाहिए था कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा। उनका कहना है कि अगर सरकार समय रहते तेल का भंडारण कर लेती, तो हालात इतने खराब नहीं होते। कादरी ने यह भी कहा कि जंग दूसरे देशों के बीच हो रही है, लेकिन इसकी कीमत पाकिस्तान के आम लोगों को चुकानी पड़ रही है।

लाहौर में भी बढ़ती कीमतों से लोग परेशान

इसी तरह Lahore के रहने वाले मोहम्मद नदीम ने बताया कि एक ही दिन में पेट्रोल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई। उनके मुताबिक अब पेट्रोल करीब 324 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है, जिससे रोजमर्रा के खर्च संभालना मुश्किल हो गया है। वहीं स्थानीय निवासी सोहैल महमूद का कहना है कि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और निकट भविष्य में इनके कम होने की उम्मीद भी कम दिखाई दे रही है।

भारत में फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर

पाकिस्तान के विपरीत भारत में अभी पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। New Delhi में पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जबकि Mumbai में इसकी कीमत करीब 103.50 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है। औसतन देश में पेट्रोल 95 से 105 रुपये प्रति लीटर के बीच मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन फिलहाल सप्लाई मैनेजमेंट और वैकल्पिक स्रोतों के कारण स्थिति नियंत्रित बनी हुई है।

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