Edited By Tanuja,Updated: 27 Jul, 2026 12:16 PM

इस्लामाबाद के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की भारी कमी से गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। सभी ICU लगभग पूरी तरह भरे हैं और एक पत्रकार की वेंटिलेटर नहीं मिलने से मौत हो गई। सरकार नए वेंटिलेटर जोड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन स्टाफ और...
Islamabad: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की भारी कमी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर स्थिति उजागर कर दी है। हालात ऐसे हैं कि अधिकांश अस्पतालों के आईसीयू (ICU) पूरी तरह भरे हुए हैं और गंभीर मरीजों को जीवनरक्षक उपकरण मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय अखबार डॉन (DAWN) की रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट के कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं मिलने से जान गंवा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार आबिद रज़ा काज़मी को स्ट्रोक आने के बाद पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) लाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी, लेकिन ICU के सभी 12 वेंटिलेटर पहले से ही व्यस्त थे। परिवार ने उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
PIMS के कार्यकारी निदेशक डॉ. राना इमरान सिकंदर ने बताया कि अस्पताल के विभिन्न विशेष ICU में 90 से अधिक वेंटिलेटर हैं, लेकिन लगभग सभी हर समय उपयोग में रहते हैं। न्यूरोलॉजी और पल्मोनोलॉजी विभागों में मरीजों को औसतन 20 दिनों तक वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है, जिससे नए मरीजों के लिए जगह नहीं बचती। उन्होंने कहा कि अस्पताल को उस समय बनाया गया था जब इस्लामाबाद की आबादी करीब 5 लाख थी, जबकि अब यह लगभग 50 लाख लोगों और देशभर से आने वाले मरीजों का इलाज कर रहा है। अस्पताल की 'नो रिफ्यूजल पॉलिसी' के कारण कई मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर करना पड़ता है। इस्लामाबाद के पॉलीक्लिनिक अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. अब्दुल जब्बार भुट्टो ने बताया कि अस्पताल के 35 वेंटिलेटर भी लगातार व्यस्त रहते हैं। उनका कहना है कि केवल नए वेंटिलेटर खरीद लेने से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों की भी भारी कमी है।
रिपोर्ट के अनुसार, निजी अस्पतालों में ICU और वेंटिलेटर का खर्च प्रतिदिन 3 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच जाता है। इसी वजह से आर्थिक रूप से सक्षम परिवार भी सरकारी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिससे वहां का दबाव और बढ़ गया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वेंटिलेटरों की नियमित तकनीकी जांच और रखरखाव भी समय पर नहीं हो पाता, क्योंकि मशीन हटाने का मतलब किसी मरीज को वेंटिलेटर से हटाना होगा, जो चिकित्सकीय और नैतिक दोनों दृष्टि से कठिन निर्णय है। सरकार PIMS में एक नया ब्लॉक तैयार कर रही है, जिसमें 40 नए वेंटिलेटर लगाए जाएंगे। वहीं, पाकिस्तान के पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने सुझाव दिया है कि चीन की कंपनियों के साथ मिलकर देश में आधुनिक वेंटिलेटर का स्थानीय उत्पादन शुरू किया जाए।