Edited By Sanjeev,Updated: 25 Oct, 2026 08:21 AM

एक अमेरिकी विमानवाहक पोत ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों के लिए जरूरी रसद और हथियारों से लैस हो रहा है। वहीं इराक और पाकिस्तान की सीमाओं पर लगाई गई पाबंदियों के कारण तेहरान और भी ज्यादा आर्थिक रूप से अलग-थलग पड़ रहा है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की...
वाशिंगटन : एक अमेरिकी विमानवाहक पोत ईरान के खिलाफ संभावित नए हमलों के लिए जरूरी रसद और हथियारों से लैस हो रहा है। वहीं इराक और पाकिस्तान की सीमाओं पर लगाई गई पाबंदियों के कारण तेहरान और भी ज्यादा आर्थिक रूप से अलग-थलग पड़ रहा है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट में इस बात की जानकारी सामने आई है। इन रिपोर्टों में सैन्य तैयारियों और व्यापार पर लगी पाबंदियों का जिक्र है, ऐसे समय में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इनमें से किसी भी रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं हुई है कि उन्होंने नए बमबारी अभियान का कोई आदेश जारी किया है।
शनिवार को प्रकाशित एक वीडियो रिपोर्ट में 'जर्नल' की शेल्बी हॉलिडे ने अरब सागर में मौजूद 'USS जॉर्ज वाशिंगटन' विमानवाहक पोत पर रात के समय विमानों के उड़ान भरने और वापस लौटने की प्रक्रिया का वर्णन किया जिसके बाद वहां बड़े पैमाने पर रसद और हथियारों की आपूर्ति (replenishment) की गई। रिपोर्ट के अनुसार ये विमान ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी लागू कर रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा कर रहे हैं। इस आपूर्ति प्रक्रिया को एक बड़े बमबारी अभियान की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
'द वाशिंगटन पोस्ट' ने भी कुछ अज्ञात अधिकारियों के हवाले से बताया है कि नवंबर में इस क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोतों और उनके साथ चलने वाले जहाजों को तैनात करने की तैयारी चल रही है। 'जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक इराक ने तस्करी रोकने का हवाला देते हुए बुधवार को 'शीब' (Sheeb) बॉर्डर क्रॉसिंग को बंद कर दिया। वहीं पाकिस्तान ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पिछले सप्ताहांत 'गाबद' (Gabd) और 'ताफतान' (Taftan) बॉर्डर पर ईरानी ट्रकों की आवाजाही को सीमित कर दिया। ये पाबंदियां 'जर्नल' की शुक्रवार की रिपोर्ट और शनिवार के प्रिंट संस्करण के आने से पहले ही लागू हो चुकी थीं। शनिवार को इन्हें किसी नई बंदी के रूप में घोषित नहीं किया गया था।
शनिवार को फ्लोरिडा के पाम बीच में जल्दी मतदान करने के बाद ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेहरान के साथ किसी समझौते, दोनों ही विकल्प अभी खुले हैं। उन्होंने कहा, 'हो सकता है कि मुझे इसे पूरी तरह खत्म करना पड़े, या शायद वे कोई समझौता कर लें, लेकिन मुझे पक्का नहीं पता।' बाद में जब उनसे संभावित हमले के समय के बारे में पूछा गया तो ट्रंप ने अपनी सोच बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमला भी हो सकता है और समझौता भी, साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या ईरान किसी समझौते का पालन करेगा या नहीं। इस बातचीत के दौरान उन्होंने न तो किसी सैन्य कार्रवाई की समय-सीमा बताई और न ही किसी समझौते की घोषणा की।
इस बीच, 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने अमेरिकी एजेंसियों के हवाले से बताया है कि मध्य पूर्व और कई अन्य देशों में अमेरिकियों के लिए खतरा, युद्ध शुरू होने के बाद से अब अपने उच्चतम स्तर पर है। अखबार ने इसके लिए कुछ अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों का हवाला दिया है। रिपोर्ट में यूरोप में संभावित लक्ष्यों का जिक्र है और खुफिया जानकारी के आधार पर यह भी बताया गया है कि ईरान के कुछ एजेंट अमेरिका के भीतर भी मौजूद हो सकते हैं। हालांकि एक अन्य अधिकारी ने चेतावनी दी कि विदेशों में हमले करने की ईरान की क्षमता सीमित है और यह उसके इरादों के मुकाबले काफी कम है। इन आकलन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई थी।
यह चेतावनी 23 अक्टूबर को 'डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस' जे क्लेटन द्वारा 'सेक्रेटरी ऑफ स्टेट' मार्को रुबियो को भेजे गए एक मेमो में दी गई थी। इससे पहले एक अमेरिकी अधिकारी ने इस मेमो की पुष्टि करते हुए कहा था कि ईरान और यमन के हूथी बलों से मिल रहे खतरों को ध्यान में रखते हुए दूतावासों में कर्मचारियों की तैनाती के बारे में फैसले लिए जा रहे हैं। अधिकारी ने कहा, 'जब दूतावासों में कर्मचारियों की तैनाती की बात आती है, तो हम सुरक्षा माहौल के बारे में मिलने वाली नई जानकारियों का लगातार आकलन करते रहते हैं।'
यह टकराव फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के साथ शुरू हुआ जिसके बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी हमले किए। इसके बाद वाशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी, जबकि साथ ही राजनयिक प्रयास भी चलते रहे।