Edited By Tanuja,Updated: 24 Oct, 2026 05:18 PM

अमेरिकी खुफिया मेमो में दावा किया गया है कि ईरान ने विदेशों में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसके बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में राजनयिक मिशनों से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को हटाया है। अन्य मध्य पूर्वी देशों...
Washington: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बीच वाशिंगटन ने मध्य पूर्व में अपने राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, 23 अक्टूबर के एक अमेरिकी खुफिया मेमो में दावा किया गया कि ईरान विदेशों में अमेरिकी कर्मियों और नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर रहा है। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान ने विदेशों में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं और कुछ कथित जानलेवा साजिशें काफी आगे के चरण में पहुंच चुकी हैं। समाचार वेबसाइट एक्सियोस और अमेरिकी समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस चेतावनी के बाद मध्य पूर्व में अमेरिकी राजनयिक मिशनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास और वाणिज्य दूतावासों से गैर-जरूरी कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को जाने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है।
23 अक्टूबर को तैयार किए गए एक पन्ने के मेमो में राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ऐसी जानकारी मिली है, जिससे विदेशों में अमेरिकी कर्मियों के लिए खतरा बढ़ने का संकेत मिलता है। मेमो के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें काफी बढ़ा दी हैं। इसमें मध्य पूर्व और कुछ अन्य देशों में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कथित जानलेवा साजिशों के उन्नत चरण में पहुंचने की चेतावनी दी गई है। क्लेटन ने यह भी कहा कि खतरे से जुड़ी जानकारी उन अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचनी चाहिए, जिन्हें फिलहाल इसे देखने की अनुमति नहीं है, लेकिन जिन्हें इसकी जरूरत हो सकती है। मेमो की एक प्रति अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ को भी भेजी गई। हालांकि, मेमो में कथित साजिशों के संभावित निशानों, देशों या उनकी विस्तृत योजना का खुलासा नहीं किया गया है।
ये खुफिया चेतावनी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका ने सऊदी अरब में अपने राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की संख्या घटाने का फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने रियाद स्थित दूतावास और जेद्दा तथा दहरान स्थित वाणिज्य दूतावासों से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी वजह सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा खतरों को बताया था, जिनमें यमन के हूती विद्रोहियों के हमले भी शामिल हैं। बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, कतर और जॉर्डन में स्थित अपने दूतावासों में भी कर्मचारियों की संख्या कम कर रहा है। इन कदमों के पीछे ईरान से जुड़े कथित खतरे और हूती विद्रोहियों के हमलों की आशंकाएं बताई गई हैं।