ईरान पर हमलों खिलाफ अमेरिका में बगावतः सीनेटर बोले- वादे तोड़कर देश को नए अंतहीन युद्ध में झोंक रहे ट्रंप

Edited By Updated: 27 May, 2026 05:00 PM

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अमेरिकी सीनेटर मार्क वॉर्नर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ नया “अंतहीन युद्ध” शुरू करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब भी ईरान पर हमले कर रहा है, जबकि ट्रंप युद्ध खत्म होने का दावा कर रहे हैं। अमेरिकी जनता भी लंबे सैन्य...

Washington: अमेरिका में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर मार्क वार्नर (Mark Warner0 ने ट्रंप पर नया “फॉरएवर वॉर” यानी अंतहीन युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया है। मार्क वॉर्नर, जो अमेरिकी सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष भी हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि युद्ध खत्म होने वाला है, लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका अब भी ईरान पर हमले कर रहा है। वॉर्नर ने कहा कि ट्रंप अपने वादे तोड़ रहे हैं, नए अंतहीन युद्ध शुरू कर रहे हैं और आम लोगों के खर्च बढ़ा रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

 

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बातचीत धीमी गति से आगे बढ़ रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में जनता भी लंबे सैन्य अभियान के पक्ष में नहीं दिख रही। एक सर्वे में केवल 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान तब तक जारी रहना चाहिए जब तक अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल न कर ले। वहीं 61 प्रतिशत लोगों ने सीमित समय के भीतर अभियान खत्म करने का समर्थन किया। एक अन्य सर्वे में 52 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं भी हो पाता है, तब भी अमेरिका को सैन्य कार्रवाई बंद कर देनी चाहिए। केवल 37 प्रतिशत लोग ही आगे सैन्य अभियान जारी रखने के पक्ष में दिखे।

 

इस बीच अमेरिकी सेना ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और बारूदी सुरंग बिछाने की कोशिश कर रही नौकाओं पर हमले किए थे। अमेरिकी सेना ने इन्हें “आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई” बताया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि होर्मुज क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते के मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों की भाषा को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है। इसी कारण समझौते को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है।

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