Edited By Tanuja,Updated: 16 Sep, 2026 05:53 PM

सूडान के वेस्ट कोर्डोफान में अल-जारा सोने की खदान ढहने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई। कई लोग अब भी लापता हैं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है। भारी मशीनरी की कमी से बचाव अभियान प्रभावित है। इलाके में पहले भी कई घातक खदान हादसे हो चुके हैं।
Khartoum: सूडान के वेस्ट कोर्डोफान प्रांत में सोने की खदान ढहने से बड़ा हादसा हुआ है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे में कम से कम 67 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसा अल-नूहूद के पास अल-जारा सोने की खदान में हुआ। खदान के कई हिस्से अचानक ढह गए और बड़ी संख्या में मजदूर मलबे के नीचे दब गए। शुरुआती रिपोर्टों में 60 मौतों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में चिकित्सकीय समूह और हादसे में बचे लोगों के हवाले से मृतकों की संख्या 67 बताई गई। हादसे के बाद स्थानीय खनिकों और बचावकर्मियों ने रातभर खोज अभियान चलाया। कई लोग अब भी खदान के भीतर फंसे बताए जा रहे हैं। एक जीवित बचे व्यक्ति के मुताबिक, खदान का ढहना इतना व्यापक था कि यह पता लगाना मुश्किल है कि अंदर कितने लोग मौजूद थे।
बचाव अभियान में भारी मशीनरी की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। मलबे में चट्टान और मिट्टी को हटाने के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं होने से राहत कार्य बेहद कठिन हो गया है। एक खनिक ने बताया कि खदान की कई सुरंगें एक-दूसरे के बेहद करीब थीं। एक हिस्से के ढहने से आसपास की सुरंगें भी इसकी चपेट में आ गईं। इसी वजह से बड़ी संख्या में मजदूरों के फंसने की आशंका जताई जा रही है। सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच युद्ध जारी है। वेस्ट कोर्डोफान का यह क्षेत्र RSF के नियंत्रण में है। देश में जारी संघर्ष और आर्थिक तबाही के बीच बड़ी संख्या में लोग सोने के छोटे पैमाने वाले खनन की ओर बढ़े हैं।
सूडान में छोटे और अनौपचारिक स्तर पर होने वाला सोने का खनन बेहद खतरनाक परिस्थितियों में होता है। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण यहां पहले भी कई जानलेवा खदान हादसे हो चुके हैं। 2023 में एक खदान हादसे में 14 और 2021 में वेस्ट कोर्डोफान में 38 लोगों की मौत हुई थी। फिलहाल बचाव अभियान खत्म नहीं हुआ है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में 67 मौतों का आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा रहा और खोज अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।