Edited By Tanuja,Updated: 19 Aug, 2026 11:32 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष दूतों को ईरान से बातचीत रोकने का निर्देश दिया है। अमेरिका अब सैन्य हमलों के बजाय लंबे समय तक आर्थिक दबाव और वित्तीय प्रतिबंधों से ईरान को कमजोर करने की रणनीति अपना रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और युद्ध...
Washington : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शीर्ष अधिकारियों और वार्ताकारों को ईरान के साथ बातचीत रोकने का निर्देश दिया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को तेहरान के साथ फिलहाल किसी तरह की बातचीत नहीं करने को कहा है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के साथ बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले थे। ट्रंप इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि ईरान उनकी शर्तों पर समझौते के लिए तैयार नहीं हो रहा है। ट्रंप अब तभी बातचीत दोबारा शुरू करना चाहते हैं, जब ईरान की ओर से किसी नए समझौते के लिए स्पष्ट इच्छा दिखाई दे।
सीएनएन के अनुसार, व्हाइट हाउस अब ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है। पहले जहां सैन्य कार्रवाई के जरिए दबाव बढ़ाने की बात सामने आ रही थी, वहीं अब लंबे समय तक आर्थिक और वित्तीय दबाव बनाकर ईरान को कमजोर करने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी ईरान के खिलाफ ऐसे कदम उठाने की बात कही है, जो पहले कभी नहीं देखे गए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान से जुड़े बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट और दुनिया भर में मौजूद संपत्तियों को निशाना बना रहा है। इसका उद्देश्य ईरानी नेतृत्व और सरकार तक पहुंचने वाले वित्तीय प्रवाह को रोकना है। ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर भी साफ कहा कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही कोई बातचीत तय है।
यह बयान उन खबरों के बीच आया है जिनमें पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। ट्रंप ने साथ ही कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी अभी भी पूरी तरह लागू है। उन्होंने दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला और संचालित है तथा वहां मौजूद समुद्री बारूदी सुरंगों को हटा दिया गया है या निष्क्रिय कर दिया गया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से समुद्री यातायात अभी भी काफी कम है।