Edited By Tanuja,Updated: 08 Aug, 2026 08:06 PM

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दावा किया कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया और विरोधी देश को कमजोर कर सीरिया जैसे हालात पैदा करना चाहते थे। उन्होंने 48 घंटे में कब्जे की योजना का भी आरोप लगाया। पेजेशकियान ने कहा कि योजना नाकाम हुई और मुस्लिम देशों...
Tehran: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया था, बल्कि विरोधियों ने सैन्य दबाव, प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव के जरिए देश को कमजोर करने की कोशिश की। पेजेशकियान ने दावा किया कि विरोधी ईरान में सीरिया जैसे हालात पैदा कर 48 घंटे में कब्जे की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हुई। उनके ये दावे ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक इंटरव्यू के दौरान सामने आए। पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की ओर से यह संघर्ष शुरू नहीं किया गया था। उनके मुताबिक, युद्ध से पहले उनकी सरकार बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद का समाधान निकालने की कोशिश कर रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधियों को उम्मीद थी कि सैन्य दबाव और देश के भीतर पैदा होने वाली परेशानियों से ईरान कमजोर होकर बिखर जाएगा। लेकिन उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ और ईरान अपनी राजनीतिक और सैन्य क्षमता के साथ खड़ा रहा। पेजेशकियान ने कहा कि मौजूदा मुश्किलों के बावजूद ईरान अपने रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा और भविष्य में और मजबूत होकर सामने आएगा। पेजेशकियान के बयान का सबसे बड़ा हिस्सा उनका 48 घंटे वाला दावा रहा। उन्होंने कहा कि विरोधियों ने सीरिया में हुए घटनाक्रम जैसी स्थिति ईरान में पैदा करने की योजना बनाई थी। उनके मुताबिक, अमेरिका और इजरायल को उम्मीद थी कि युद्ध, सैन्य दबाव और दूसरे कदमों के जरिए ईरान को तेजी से अस्थिर किया जा सकेगा। पेजेशकियान ने दावा किया कि इस पूरी योजना का लक्ष्य ईरान को बेहद कम समय में कमजोर करना था। हालांकि, 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की योजना का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है, इसलिए यह बात पेजेशकियान के दावे के तौर पर ही देखी जानी चाहिए।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि विरोधियों ने ईरान को कमजोर करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उन्होंने ईरानी जनता की एकजुटता को इसका बड़ा कारण बताया। पेजेशकियान ने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में भी देश की संस्थाएं और जनता मजबूती से खड़ी रहीं। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सैन्य और आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान आत्मसमर्पण करने के बजाय अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा। पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से भी एकजुट होने की अपील की। उनका कहना था कि बाहरी ताकतों से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए मुस्लिम देशों के बीच एकता जरूरी है।उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम देश एकजुट होकर अपनी राजनीतिक और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करें तो बाहरी दबावों का मुकाबला ज्यादा प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
पेजेशकियान ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनसे संवाद करना काफी मुश्किल है, लेकिन साथ ही उनकी भूमिका को ईरान की ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। मोजतबा खामेनेई मार्च 2026 में अपने पिता अली खामेनेई की मौत के बाद सर्वोच्च नेता बने। इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से बेहद कम दिखाई दिए हैं। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने उनके सक्रिय रूप से सरकार की रणनीति में शामिल होने की बात कही है।