Edited By Pardeep,Updated: 25 May, 2026 11:22 PM

ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया और कड़ा रुख अपनाकर दुनिया भर में हलचल मचा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा समझौते में प्रगति के संकेतों के ठीक बाद, ट्रम्प ने एक नई शर्त...
वाशिंगटन/नई दिल्ली: ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया और कड़ा रुख अपनाकर दुनिया भर में हलचल मचा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा समझौते में प्रगति के संकेतों के ठीक बाद, ट्रंप ने एक नई शर्त थोप दी है। ट्रंप अब चाहते हैं कि ईरान सहित मिडिल ईस्ट के तमाम प्रमुख देश 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) का हिस्सा बनें।
'ट्रुथ सोशल' पर ट्रंप की दो टूक चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट में स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ने इस जटिल स्थिति को सुलझाने में बहुत मेहनत की है, इसलिए अब सऊदी अरब, यूएई, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "या तो यह सभी के लिए एक 'ग्रेट डील' होगी या फिर कोई डील नहीं होगी—हम फिर से युद्ध के मैदान में होंगे और गोलीबारी शुरू होगी, जो पहले से कहीं बड़ी और भयावह होगी"।
सऊदी अरब और कतर से की पहल की मांग
ट्रंप ने विशेष रूप से सऊदी अरब और कतर को पहले कदम उठाने के लिए कहा है। उन्होंने 'अब्राहम समझौते' की तारीफ करते हुए इसे शामिल देशों के लिए आर्थिक और सामाजिक 'बूम' बताया है। हालांकि, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे इस समझौते में तभी शामिल होंगे जब फिलिस्तीन के लिए 'दो-राष्ट्र समाधान' (Two-state solution) का स्पष्ट रास्ता दिखेगा।
ईरान के लिए भी खुले हैं रास्ते
चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने ईरान को भी इस 'अब्राहम गठबंधन' में शामिल होने का न्यौता दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान उनके साथ समझौता करता है, तो उसे इस वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बनाना उनके लिए सम्मान की बात होगी।
भारत में रूबियो ने जताई थी उम्मीद, पर ईरान ने खींचे हाथ
दिलचस्प बात यह है कि यह नई मांग तब आई जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नई दिल्ली के दौरे के दौरान पत्रकारों से कहा था कि एक ठोस प्रस्ताव मेज पर है और जल्द ही कोई अच्छी खबर मिल सकती है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इन उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कहा कि हालांकि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि समझौता बिल्कुल करीब है।
क्या हैं ट्रंप की अन्य कड़ी शर्तें? अब्राहम समझौते के अलावा, ट्रंप की शर्तों की सूची काफी लंबी है:
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज: ईरान को वैश्विक व्यापार के लिए इस मार्ग को पूरी तरह खुला रखना होगा।
- यूरेनियम संवर्धन: ईरान को अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह बंद करना होगा।
- कोई मुआवजा नहीं: संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए तेहरान को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
वर्तमान में, दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम (Ceasefire) जारी है, लेकिन तनाव अब भी चरम पर है क्योंकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है।