ईरान के साथ टकराव खत्म करने की राह तलाश रहे ट्रंप, होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी नजर

Edited By Updated: 09 Aug, 2026 10:41 PM

trump seeks a way to end the standoff with iran focus remains on the strait of

ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब मौजूदा टकराव से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस संघर्ष को खत्म करना ट्रंप के लिए आसान माना जा रहा था, वह उनकी...

नेशनल डेस्क : ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब मौजूदा टकराव से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस संघर्ष को खत्म करना ट्रंप के लिए आसान माना जा रहा था, वह उनकी उम्मीद से कहीं अधिक जटिल हो गया है।

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप पिछले कई हफ्तों से ऐसे समाधान की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वे बिना किसी नए परमाणु समझौते के भी ईरान के साथ टकराव खत्म कर सकें। इसके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना एक अहम विकल्प माना जा रहा है। यदि तेहरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोल देता है, तो ट्रंप इसे संघर्ष में अपनी जीत के तौर पर पेश कर सकते हैं।

हालांकि, ईरान ने जलडमरूमध्य खोलने के लिए कई शर्तें रख दी हैं। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी, प्रतिबंधों को समाप्त करना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और कथित युद्ध क्षति का मुआवजा शामिल है। ईरान ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने और क्षेत्र में उसके सहयोगी समूहों के खिलाफ अभियान खत्म करने की भी मांग की है।

होर्मुज बना टकराव का अहम मुद्दा

होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही को प्रभावित करने की ईरान की क्षमता ने उसे बातचीत में महत्वपूर्ण बढ़त दी है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली है।

ट्रंप ने हाल के दिनों में कई बार दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के युद्धपोतों के रास्ते पर आपत्ति जताई है। ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कुछ वाणिज्यिक जहाजों से शुल्क लेने की कोशिश भी की है, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया है।

हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर उसके एक जहाज को मिसाइल से निशाना बनाने का आरोप लगाया। इसके बाद ईरान की ओर से जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्तें सामने आईं।

ट्रंप के लिए घरेलू दबाव भी चुनौती

रिपोर्ट में कहा गया है कि टकराव को खत्म करने की ट्रंप की कोशिशों के पीछे घरेलू राजनीतिक दबाव भी एक कारण हो सकता है। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं और युद्ध शुरू होने के बाद पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ी हैं। ऐसे में ट्रंप के सामने अमेरिकी जनता को यह समझाने की चुनौती है कि सैन्य अभियान ने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।

हाल के दिनों में ट्रंप ने दावा किया कि वह ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार थे, लेकिन सहयोगियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने ईरान के साथ जल्द समझौते की संभावना भी जताई है। हालांकि, अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक ऐसे लेख को भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति संघर्ष को अपनी जीत के रूप में पेश करने का रास्ता तलाश रहे हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा है कि प्रशासन ईरान पर अमेरिका के साथ अपने संबंधों में दीर्घकालिक बदलाव के लिए दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान ऐसा नहीं करता है तो अमेरिका उस पर दबाव जारी रखेगा और क्षेत्र से तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देगा, ताकि अमेरिकी उपभोक्ताओं को ऊर्जा की कम कीमतों का लाभ मिल सके।

परमाणु समझौता पीछे छूट सकता है

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा है। ट्रंप प्रशासन ने लगातार कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शुरुआत में ट्रंप ने परमाणु मुद्दे को किसी भी संभावित समझौते का अहम हिस्सा बनाने की कोशिश की थी, लेकिन बातचीत में मुश्किलें आने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर अधिक जोर दिया जाने लगा।

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों से कहा है कि उन्हें लगता है कि मई 2025 में ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान के लिए अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करना मुश्किल होगा।

ट्रंप का यह भी मानना है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान के परमाणु ठिकानों को दोबारा बनाने या गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिशों का पता लगा सकती हैं। उनका तर्क है कि भविष्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का डर ईरान को परमाणु कार्यक्रम दोबारा शुरू करने से रोक सकता है।

ट्रंप ने ईरान के भूमिगत यूरेनियम भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी कम करके आंका है। जुलाई में नाटो की बैठक के दौरान उन्होंने कहा था कि ईरान के पास मौजूद परमाणु सामग्री इतनी गहराई में है कि उसे हासिल करना आसान नहीं है।

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