Edited By Tanuja,Updated: 04 Jun, 2026 06:04 PM

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की वार्ता एक बड़े गतिरोध में फंस गई है। ईरान शुरुआती चरण में ही अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्ति नकद रूप में जारी करने की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका बिना परमाणु रियायतों के कोई आर्थिक राहत देने को तैयार नहीं है।
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु और सुरक्षा वार्ताएं एक गंभीर गतिरोध में फंस गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने मांग की है कि समझौते के पहले चरण में ही उसकी अरबों डॉलर की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को नकद रूप में जारी किया जाए। यही मांग दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गई है। सूत्रों के मुताबिक, तेहरान चाहता है कि किसी भी समझौते की शुरुआत में ही उसके फ्रीज किए गए फंड जारी किए जाएं। दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी। यही वजह है कि कई दिनों से चल रही मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद कोई बड़ा समाधान नहीं निकल पाया है।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति : डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि वार्ता "काफी अच्छी" चल रही है। उन्होंने यह भी माना कि समझौते की कोई गारंटी नहीं है। ट्रंप ने कहा, "यह समझौता हो भी सकता है और नहीं भी। ईरान के साथ बातचीत में कुछ भी हो सकता है।" ट्रंप ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस सामग्री को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। उनके अनुसार, दुनिया में केवल अमेरिका और चीन के पास ही ऐसी तकनीकी क्षमता है, जो इस तरह की संवेदनशील परमाणु सामग्री को सुरक्षित तरीके से संभाल सकती है। वार्ता का एक अहम विषय Strait of Hormuz भी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ट्रंप ने दावा किया कि समझौता होते ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा और समुद्री यातायात सामान्य हो जाएगा।
इसी बीच कुवैत के International Airport पर हुए घातक हमले ने क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा दिया है। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हुई और 63 लोग घायल हुए। भारत के Ministry of External Affairs ने नागरिक ढांचे पर हमले की कड़ी निंदा की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कुवैत का दावा है कि उस पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया। लेकिन ईरान के IRGC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नुकसान अमेरिकी निर्मित पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की तकनीकी खराबी के कारण हुआ।