Edited By Tanuja,Updated: 28 May, 2026 11:55 AM

अमेरिका ने ईरानी ड्रोन मार गिराने के बाद बंदर अब्बास के सैन्य अड्डे पर हमला किया है। दूसरी ओर कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले से युद्धविराम पर संकट गहरा गया। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव...
International Desk: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान की तरफ से दागे गए चार ड्रोन मार गिराए और इसके बाद दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास स्थित एक सैन्य अड्डे पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन ड्रोन से होर्मुज जलडमरूमध्य को खतरा माना जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि जिस सैन्य अड्डे पर हमला किया गया, वहां से पांचवां ड्रोन छोड़े जाने की तैयारी चल रही थी। अमेरिका ने इसे “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान “आखिरी सांसें गिन रहा है” और दोनों देश समझौते के करीब हैं। ट्रंप ने कहा कि वह जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेंगे, चाहे नवंबर में मध्यावधि चुनाव ही क्यों न हों। उन्होंने कहा, “या तो समझौता होगा या फिर हमें काम पूरा करना होगा।” इस बीच अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।
इस बार निशाना ईरान की “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” बनी है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण और भारी शुल्क लगाने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने कहा कि ईरान वैश्विक समुद्री व्यापार को बाधित करने की कोशिश कर रहा है और यह आर्थिक दबाव की वजह से उसकी बढ़ती परेशानी को दिखाता है। ईरान की इस संस्था ने हाल ही में घोषणा की थी कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अनुमति लेनी होगी और प्रति जहाज लगभग 20 लाख डॉलर तक शुल्क देना पड़ सकता है। ईरान के “रिवोल्यूशनरी गार्ड” ने भी चेतावनी दी कि तय समुद्री मार्ग से हटने वाले जहाजों को हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
उधर, कुवैत ने भी बृहस्पतिवार को खुलासा किया कि उस पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया गया है। कुवैत की सेना ने हमले की पुष्टि की, लेकिन यह नहीं बताया कि किन स्थानों को निशाना बनाया गया। हालांकि किसी संगठन ने अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन इससे ईरान युद्धविराम पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले भी ईरान समर्थित शिया गुट कुवैत को निशाना बना चुके हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, कुवैत पर हमला और नए प्रतिबंध पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकते हैं। पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर टिकी हुई है।