Edited By Tanuja,Updated: 06 Jul, 2026 07:00 PM

महाराष्ट्र के रत्नागिरी की प्राजक्ता भांबुरे-बोंगाले अमेरिकी सेना के मेडिकल विभाग में शामिल हुई हैं। बताया जा रहा है कि वह अमेरिकी सेना में शामिल होने वाली पहली मराठी महिला हैं। उनकी उपलब्धि की सोशल मीडिया पर सराहना हो रही है, वहीं कुछ लोग इसे लेकर...
International Desk: भारत की प्राजक्ता भांबुरे-बोंगाले इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के दापोली की रहने वाली प्राजक्ता अमेरिकी सेना (US Army) में शामिल होने वाली पहली मराठी महिला हैं। उन्होंने आठ महीने का कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अमेरिकी सेना के मेडिकल विभाग में अपनी सेवाएं शुरू की हैं।रिपोर्टों के अनुसार, प्राजक्ता ने अमेरिकी सेना की कठोर प्रशिक्षण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। इसके बाद उन्हें मेडिकल विभाग में नियुक्त किया गया, जहां वह सैनिकों और सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में योगदान देंगी।
कोकणाचा जगभर डंका! अमेरिकन सैन्यात दाखल होणारी पहिली मराठी महिला.... pic.twitter.com/E4tHz9S4Ku
— मराठी माणूस (@mhmaoous) July 4, 2026
जैसे ही उनकी उपलब्धि सोशल मीडिया पर वायरल हुई, लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। एक वर्ग ने इसे भारतीय मूल की महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताते हुए प्राजक्ता को बधाई दी। लोगों का कहना है कि किसी भी वैश्विक संस्था में कठिन चयन प्रक्रिया पार कर जगह बनाना बड़ी उपलब्धि है।वहीं, दूसरे वर्ग ने सवाल उठाया कि यदि कोई भारतीय मूल का व्यक्ति किसी दूसरे देश की सेना में शामिल होता है, तो क्या इसे भारत की उपलब्धि के रूप में मनाया जाना चाहिए?
कोकणाचा जगभर डंका! अमेरिकन सैन्यात दाखल होणारी पहिली मराठी महिला.... pic.twitter.com/6ADTFzeB7D
— माझा महाराष्ट्र (@MaajhaMharashtr) July 4, 2026
कुछ यूजर्स ने लिखा कि उन्हें भारतीय सेना में भारतीय युवाओं की भर्ती पर अधिक गर्व होगा, जबकि कुछ ने काल्पनिक परिस्थितियों को लेकर भी सवाल उठाए। प्राजक्ता की सफलता ने एक ओर उनकी मेहनत और समर्पण की सराहना कराई है, वहीं दूसरी ओर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि किसी विदेशी सेना में भारतीय मूल के व्यक्ति की भर्ती को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।