जनहित याचिका में अभिभावकों को स्कूल की फीस किश्तों में देने की अनुमति दिये जाने का अनुरोध

Edited By Updated: 15 Jun, 2021 10:43 PM

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मुंबई, 15 जून (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को उस एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जवाब दाखिल करने का मंगलवार को निर्देश दिया जिसमें अनुरोध किया गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक संकट को देखते हुए अभिभावकों को किश्तों में...

मुंबई, 15 जून (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को उस एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर जवाब दाखिल करने का मंगलवार को निर्देश दिया जिसमें अनुरोध किया गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक संकट को देखते हुए अभिभावकों को किश्तों में स्कूल की फीस का भुगतान करने की अनुमति दी जाये।

न्यायमूर्ति एस पी देशमुख और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ ने राज्य से यह भी बताने को कहा कि लोग महाराष्ट्र शैक्षिक संस्थान (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2011 के तहत गठित मंडल शुल्क नियामक समितियों से कैसे संपर्क कर सकते हैं।

भाजपा विधायक अतुल भाटखलकर द्वारा दाखिल जनहित याचिका में अनुरोध किया गया है कि सरकार को शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश देना चाहिए कि वे 2020-21 और 2021-22 के लिए शुल्कों में छूट पर माता-पिता के अनुरोधों पर ‘‘सहानुभूतिपूर्वक’’ विचार करें। इसमें कहा गया है कि संस्थानों को यह भी निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे माता-पिता को किश्तों में बकाया भुगतान करने की अनुमति दें।

याचिकाकर्ता के वकील बीरेंद्र सराफ ने कहा कि महामारी के दौरान, कई गैर सहायता प्राप्त स्कूलों ने अपनी फीस में वृद्धि की और ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन के लिए अतिरिक्त शुल्क भी लेना शुरू कर दिया।

उच्च न्यायालय इस महीने के अंत में जनहित याचिका पर आगे सुनवाई करेगा।



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