रिजर्व बैंक की नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ योजना के तहत छह इकाइयों ने ‘पहले समूह’ का परीक्षण पूरा किया

Edited By Updated: 14 Sep, 2021 10:34 AM

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मुंबई, 13 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ योजना के तहत छह इकाइयों ने ‘पहले समूह’ का परीक्षण चरण पूरा कर लिया है। इसका विषय खुदरा भुगतान है। उनके उत्पादों को नियामकीय इकाइयों द्वारा स्वीकार्यता के लिए...

मुंबई, 13 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि नियामकीय ‘सैंडबॉक्स’ योजना के तहत छह इकाइयों ने ‘पहले समूह’ का परीक्षण चरण पूरा कर लिया है। इसका विषय खुदरा भुगतान है। उनके उत्पादों को नियामकीय इकाइयों द्वारा स्वीकार्यता के लिए व्यावहारिक माना गया है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि इन इकाइयों के उत्पाद मुख्य रूप से ऑफलाइन डिजिटल भुगतान, प्रीपेड कार्ड, संपर्करहित भुगतान और वॉयस आधारित यूपीआई से संबंधित हैं।
नियामकीय सैंडबॉक्स से सामान्य तौर पर तात्पर्य नियंत्रित/परीक्षण वाले नियामकीय माहौल में नए उत्पादों और सेवाओं के सीधे परीक्षण से होता है। इसमें नियामक कुछ रियायतों की अनुमति भी दे सकता है।
पहले समूह में जिन इकाइयों के उत्पाद रिजर्व बैंक द्वारा तय निमयों के अनुकूल पाए गए हैं उनमें न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट्स (पेसे), टैप स्मार्ट डेटा इन्फॉर्मेशन सर्विसेज (सिटीकैश), नैचुरल सपोर्ट कंसल्टेंसी सर्विसेज (आईएनडी-ई-कैश), नफा इनोवेशंस (टोन टैग), उबोना टेक्नोलॉजीज (भीम वॉयस) और ईरूट टेक्नोलॉजीज (सिम के जरिये ऑफलाइन भुगतान) शामिल हैं।
रिजर्व बैंक ने कहा कि इन उत्पादों का आकलन परस्पर सहमति वाले परीक्षण परिदृश्य तथा संभावित नतीजों के आधार पर किया गया।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये इकाइयां अब खुदरा भुगतान पर नियामकीय सैंडबॉक्स के पहले समूह से बाहर निकल गई हैं।


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