32nd एवेन्यू के सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा गिरफ्तार, 500 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

Edited By Updated: 08 Feb, 2026 08:28 PM

32nd avenue ceo dhruv dutt sharma arrested accused of rs 500 crore fraud

गुरुग्राम में रियल एस्टेट धोखाधड़ी का मामला: 32nd एवेन्यू के सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा को एक ही फ्लोर को 25 से अधिक लोगों को बेचने और निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। शिकायत ट्राम वेंचर्स प्राइवेट...

नेशनल डेस्कः कमर्शियल प्रोजेक्ट 32nd एवेन्यू के संस्थापक और सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा को एक ही इमारत की एक मंजिल कई लोगों को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी से निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए शर्मा को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज और जांच के बाद सामने आया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच में यह खुलासा हुआ है कि ध्रुव दत्त शर्मा ने एक ही फ्लोर को 25 से अधिक लोगों को अलग-अलग समय पर बेच दिया, जबकि किसी भी खरीदार को वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। यह मामला जनवरी महीने में तब सामने आया जब ट्राम वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रतिनिधि ने गुरुग्राम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2021 में अपरा मोटल्स प्राइवेट लिमिटेड (जिसे बाद में 32 माइलस्टोन विस्टास प्राइवेट लिमिटेड नाम दिया गया) के निदेशकों और शेयरधारकों ने उनसे संपर्क किया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 32वें माइलस्टोन कॉम्प्लेक्स की पहली मंजिल पर स्थित लगभग 3000 वर्ग फुट का एक यूनिट (नंबर 24) उन्हें 2.5 करोड़ रुपये में बेचा गया। यह पूरी राशि 21 सितंबर 2021 को अदा कर दी गई थी। इसके बावजूद, खरीदार को न तो रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज मिले और न ही संपत्ति का वैधानिक हस्तांतरण किया गया। आगे की जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 और 2023 के बीच, उसी फ्लोर से संबंधित एक अहम दस्तावेज 25 अन्य व्यक्तियों के नाम पर तैयार किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि एक ही संपत्ति को कई निवेशकों को बेचा गया।

गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में ध्रुव दत्त शर्मा ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 2021 में शिकायतकर्ता कंपनी से सौदा किया था, लेकिन उस फ्लोर का विक्रय पत्र कभी उनके नाम पर निष्पादित नहीं किया गया। पुलिस के मुताबिक, जिन 25 व्यक्तियों को वह फ्लोर बेचा गया था, उनसे बाद में उसी संपत्ति को शर्मा की दूसरी कंपनी – ग्रोथ हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर 30 वर्षों के लिए लीज पर ले लिया गया।

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