Edited By Anu Malhotra,Updated: 06 Feb, 2026 09:03 AM

जीत और दिवा की शादी की पहली सालगिरह सिर्फ निजी खुशियों का जश्न नहीं, बल्कि सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान लाने का जरिया बनी। अपनी शादी के एक साल पूरे होने पर, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के छोटे बेटे जीत अडानी और उनकी पत्नी दिवा शाह ने 'मंगल सेवा'...
नेशनल डेस्क: जीत और दिवा की शादी की पहली सालगिरह सिर्फ निजी खुशियों का जश्न नहीं, बल्कि सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान लाने का जरिया बनी। अपनी शादी के एक साल पूरे होने पर, अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के छोटे बेटे जीत अडानी और उनकी पत्नी दिवा शाह ने 'मंगल सेवा' पहल के जरिए रिश्तों में सुरक्षा और सम्मान का एक नया उदाहरण पेश किया है।
आत्मनिर्भरता का 'सुरक्षा कवच'
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवविवाहित दिव्यांग महिलाओं को आर्थिक रूप से इतना मजबूत बनाना है कि वे कभी खुद को असुरक्षित या दूसरों पर निर्भर महसूस न करें। जीत अडानी ने इस मौके पर एक बड़ी घोषणा को दोहराया कि हर साल 500 दिव्यांग महिलाओं को 10-10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दी जाएगी।
यह केवल एक आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि भविष्य की एक ठोस योजना है। इस एफडी से मिलने वाला ब्याज उन महिलाओं को हर साल अपने खर्चे चलाने और घर में योगदान देने में मदद करेगा। सबसे खास बात यह है कि 10 साल का समय पूरा होने पर, यह पूरी 10 लाख रुपये की राशि उन्हीं महिलाओं की हो जाएगी, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
डर की जगह आत्मविश्वास ने ली
अडानी एयरपोर्ट्स के डायरेक्टर जीत अडानी ने कार्यक्रम में दिल छू लेने वाली बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि अक्सर दिव्यांग महिलाओं के लिए शादी खुशियों के साथ-साथ कई अनकहे डर भी लेकर आती है—जैसे कि स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा की चिंता। जीत ने एक ऐसी महिला का उदाहरण दिया जो सुन नहीं सकती थी, लेकिन इस पहल से मिली आर्थिक मदद के बाद अब वह न केवल अपने परिवार की मदद कर रही है, बल्कि अपने बच्चे के भविष्य के सपने भी बुन रही है। जीत के अनुसार, "चिंता से आत्मविश्वास तक का यह सफर ही मंगल सेवा का असली मकसद है।"
पिता का भावुक संदेश
बेटे और बहू के इस कदम पर गौतम अडानी ने अपनी खुशी सोशल मीडिया के जरिए साझा की। उन्होंने एक पिता के तौर पर गर्व महसूस करते हुए लिखा कि जब कोई बेटी फिर से मुस्कुराती है और उसमें खुद पर भरोसा जागता है, तो वह संतोष दुनिया की किसी भी बड़ी कामयाबी या दौलत से कहीं ऊपर होता है। उन्होंने इस बात की सराहना की कि जीत और दिवा अपनी निजी खुशियों के बीच उन परिवारों के बारे में सोच रहे हैं जिन्हें सहारे की जरूरत है।
दिवा शाह ने भी इस मौके पर सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान जीत ने खुद 21 दिव्यांग दुल्हनों और उनके पतियों से मुलाकात कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। 'मंगल सेवा' अब केवल एक चैरिटी नहीं, बल्कि एक ऐसा आंदोलन बन रहा है जो दिव्यांग बहनों को समाज में सिर उठाकर जीने का मौका दे रहा है।