Edited By Ramanjot,Updated: 30 Jan, 2026 08:37 PM

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराज्यीय नशा तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट पर करारा प्रहार करते हुए कर्नाटक के मैसूर में चल रही एक गुप्त सिंथेटिक ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का पर्दाफाश किया है।
नेशनल डेस्क: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराज्यीय नशा तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट पर करारा प्रहार करते हुए कर्नाटक के मैसूर में चल रही एक गुप्त सिंथेटिक ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का पर्दाफाश किया है। हेब्बल इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित इस लैब से मेफेड्रोन (MD) जैसी खतरनाक मादक दवाओं का उत्पादन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स, नकदी और एक लग्जरी SUV जब्त की गई है। अब तक इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
सूरत में पकड़ी गई SUV से खुला पूरा नेटवर्क
NCB को इनपुट मिला था कि कर्नाटक नंबर की एक टोयोटा फॉर्च्यूनर में भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी की जा रही है। इसी सूचना पर 28 जनवरी 2026 को गुजरात के सूरत जिले के पलसाना क्षेत्र में वाहन को रोका गया। तलाशी के दौरान कार से 35 किलो मेफेड्रोन बरामद किया गया। इसके बाद NCB और सूरत पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी महेंद्र कुमार विश्नोई के पलसाना स्थित ठिकाने पर छापा मारा, जहां से 1.8 किलो अफीम, 25.6 लाख रुपये नकद और ड्रग निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स बरामद किए गए।
जेल में सीखी तकनीक, फैक्ट्री की आड़ में चला रहा था ड्रग लैब
जांच में सामने आया है कि महेंद्र कुमार विश्नोई इस पूरे रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड है। वह पहले भी अफीम और स्मैक की तस्करी में शामिल रहा है। जेल में रहने के दौरान उसने सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की तकनीकी जानकारी हासिल की। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने मैसूर में एक फैक्ट्री किराए पर ली, जहां बाहर से क्लीनिंग केमिकल्स बनाने का काम दिखाया जाता था, जबकि अंदर अत्याधुनिक मशीनों से MD ड्रग्स तैयार की जा रही थीं। NCB ने इस फैक्ट्री को फॉरेंसिक जांच के लिए सील कर दिया है।
2024 से चल रही थी गुप्त यूनिट, कई खेप हो चुकी थीं सप्लाई
NCB के मुताबिक यह अवैध ड्रग लैब वर्ष 2024 से सक्रिय थी और अब तक कई बार नशीले पदार्थों की सप्लाई देश के अलग-अलग राज्यों में की जा चुकी थी। आरोपी के खिलाफ राजस्थान में तीन और गुजरात में एक पुराना मामला पहले से दर्ज है। मेफेड्रोन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए NCB ने सभी राज्यों को Red Flag Indicators (RFI) जारी किए हैं, ताकि ऐसी छिपी हुई लैब्स की समय रहते पहचान की जा सके।
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
NCB अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के खिलाफ एजेंसी की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने में यह ऑपरेशन अहम माना जा रहा है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।