Edited By Parveen Kumar,Updated: 21 Mar, 2026 02:46 AM

देश में बड़ी संख्या में बच्चों के स्कूल से बाहर होने की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं में असफल होने वाले और किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके छात्रों को...
नेशनल डेस्क : देश में बड़ी संख्या में बच्चों के स्कूल से बाहर होने की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं में असफल होने वाले और किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके छात्रों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाना है।
जिला स्तर पर होगी पहचान और नामांकन
नई योजना के तहत प्रत्येक जिले में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। इसके बाद उन्हें फिर से स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न रहे।
रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
यह कदम हाल ही में जारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2023-24 के आंकड़ों के बाद उठाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2 करोड़ बच्चे शिक्षा से दूर हैं। वहीं, कक्षा 3 से 8 तक के लगभग 11 प्रतिशत छात्र भी स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। हर साल बड़ी संख्या में छात्रों के बोर्ड परीक्षाओं में असफल होने से ड्रॉपआउट की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
ओपन स्कूलिंग से मिलेगा सहारा
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) इस अभियान में राज्यों के साथ मिलकर काम करेगा। इसमें ओपन स्कूलिंग सिस्टम और राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान (NIOS) की महत्वपूर्ण भूमिका तय की गई है, जिससे छात्रों को लचीले तरीके से पढ़ाई जारी रखने का मौका मिलेगा।
ऑन-डिमांड परीक्षा और लचीली पढ़ाई
इस योजना के तहत छात्रों को परीक्षा पास करने के कई अवसर दिए जाएंगे। वे ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली का लाभ उठा सकेंगे, जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा दे सकेंगे। साथ ही, व्यावसायिक (वोकेशनल) कोर्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें अन्य शैक्षणिक बोर्डों के बराबर मान्यता मिलेगी।
शिक्षा में वापसी का नया रास्ता
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से लाखों बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ा जा सकेगा और देश में ड्रॉपआउट दर को कम करने में मदद मिलेगी। यह कदम शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।