वैश्विक तनाव के बाद भी भारत ने दिखाया दम, इतना बढ़ गया सरकारी खजाना

Edited By Updated: 11 Apr, 2026 12:58 AM

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रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका के बीच जारी वैश्विक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में एक बार फिर से मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे बाजार में सकारात्मक संकेत मिले हैं।

नेशनल डेस्क : रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका के बीच जारी वैश्विक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में एक बार फिर से मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे बाजार में सकारात्मक संकेत मिले हैं।

9.06 अरब डॉलर की बड़ी बढ़त

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 9.06 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही कुल भंडार बढ़कर 697.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है।

विदेशी मुद्रा संपत्ति और सोने में इजाफा

फॉरेक्स रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) होता है, जिसमें करीब 1.78 अरब डॉलर की बढ़त दर्ज की गई। यह हिस्सा यूरो, पाउंड और येन जैसी अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। इसके अलावा, देश के गोल्ड रिजर्व में भी लगभग 1.78 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल भंडार को मजबूती मिली है।

SDR और IMF पोजिशन में स्थिरता

स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में हल्की बढ़त के साथ यह 18.707 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की रिजर्व पोजिशन 4.816 अरब डॉलर पर स्थिर बनी हुई है।

पिछले हफ्ते आई थी गिरावट

इससे पहले 27 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 10.28 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 688.05 अरब डॉलर पर आ गया था। लगातार गिरावट से बाजार में चिंता का माहौल बन गया था।

वेस्ट एशिया तनाव का असर

फरवरी के अंत में भारत का फॉरेक्स रिजर्व 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इसमें गिरावट देखने को मिली। इसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा था।

रुपये को स्थिर रखने में RBI सक्रिय

रुपये पर दबाव को कम करने के लिए RBI लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। केंद्रीय बैंक डॉलर की बिक्री और अन्य नीतिगत उपायों के जरिए स्थिति को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

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