Edited By Pardeep,Updated: 23 May, 2026 10:40 PM

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के निजी गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) स्कूलों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के निजी गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) स्कूलों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि इन स्कूलों को नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अपनी फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय (DoE) से किसी भी प्रकार की पूर्व मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है,।
प्राइवेट स्कूलों की बड़ी जीत, DoE को लगी फटकार
जस्टिस अनूप जयराम भंबानी ने डीपीएस वसंतकुंज समेत कई स्कूलों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (DSE Act) के तहत स्कूलों की जिम्मेदारी केवल इतनी है कि वे सत्र शुरू होने से पहले अपनी प्रस्तावित फीस का विवरण निदेशालय को सौंप दें,। अदालत ने निदेशालय की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि विभाग ने बिना किसी ठोस आधार के स्कूलों पर मुनाफाखोरी के आरोप लगाए और कानूनी आदेशों की अनदेखी की,।
'मुनाफाखोरी' और 'विकास फंड' पर कोर्ट का रुख
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि स्कूलों द्वारा विकास और विस्तार के लिए 'उचित अधिशेष' (Reasonable Surplus) रखना मुनाफाखोरी नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार, शिक्षा निदेशालय स्कूलों के वित्तीय मामलों का 'माइक्रो मैनेजमेंट' नहीं कर सकता। निदेशालय का अधिकार केवल यह सुनिश्चित करने तक सीमित है कि स्कूल शिक्षा का व्यवसायीकरण न करें या कैपिटेशन फीस न लें। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि किसी स्कूल के पास सरप्लस राशि होना मात्र ही यह साबित करने के लिए काफी नहीं है कि वह मुनाफाखोरी कर रहा है; इसके लिए विस्तृत ऑडिट जरूरी है।
अभिभावकों को राहत: पिछली बकाया फीस पर रोक
जहां एक तरफ स्कूलों को स्वायत्तता मिली है, वहीं हाईकोर्ट ने अभिभावकों के हितों की भी रक्षा की है। अदालत ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि स्कूल पुराने शैक्षणिक सत्रों (जैसे 2016-17) की बकाया फीस नहीं वसूल सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद पिछली अवधि की फीस मांगना अभिभावकों पर एक अनुचित और अस्वीकार्य बोझ होगा।
अप्रैल 2027 से लागू होगी नई फीस
अदालत के निर्देशानुसार, स्कूलों द्वारा प्रस्तावित अंतिम फीस वृद्धि अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले अगले सत्र से ही प्रभावी होगी। साथ ही, यदि कोई स्कूल चल रहे सत्र के बीच में फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे अभी भी शिक्षा निदेशालय से पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।