Edited By Pardeep,Updated: 25 May, 2026 01:01 AM

पूरी दुनिया में इस समय कच्चे तेल के संकट ने हाहाकार मचा रखा है। जहां एक ओर हांगकांग और लंदन जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं, वहीं भारत में स्थिति अब भी काफी हद तक काबू में है।
नेशनल डेस्कः पूरी दुनिया में इस समय कच्चे तेल के संकट ने हाहाकार मचा रखा है। जहां एक ओर हांगकांग और लंदन जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं, वहीं भारत में स्थिति अब भी काफी हद तक काबू में है। हालांकि, बीते 10 दिनों के भीतर भारतीय तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3 बार इजाफा किया है, जिससे कुल कीमतों में लगभग 4.80 रुपये से लेकर 5.00 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है।
10 दिन में 3 झटके, फिर भी भारत सबसे आगे
वैश्विक संकट के बीच भारत में तेल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी दुनिया के मुकाबले सबसे कम मानी जा रही है। भारत में लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहने के बाद 15 मई को पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद 19 मई को औसतन 90 पैसे और फिर 23 मई को पेट्रोल पर 87 पैसे व डीजल पर 91 पैसे प्रति लीटर का और इजाफा किया गया। इस बढ़ोतरी के कारण फ्यूल स्टेशनों पर भारी भीड़ और राजनीतिक गलियारों में विरोध की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं।
दुनिया का हाल जान उड़ जाएंगे होश
अगर भारत की तुलना दुनिया के बाकी देशों से करें, तो विदेशी आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- हांगकांग: यहां पेट्रोल की कीमत ₹300 प्रति लीटर के करीब पहुंच चुकी है।
- लंदन: ब्रिटिश राजधानी में पेट्रोल ₹190 प्रति लीटर के पार निकल गया है।
- नीदरलैंड्स: यहां जनता को ₹245 से ₹255 प्रति लीटर तक भुगतान करना पड़ रहा है।
- यूरोपीय यूनियन: समूचे यूरोपीय संघ में औसतन कीमत ₹179 प्रति लीटर के पार है।
सरकार और तेल कंपनियों ने झेला नुकसान
भारत में स्थिति को नियंत्रित रखने के पीछे सरकार की ठोस रणनीति रही है। जब अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण क्रूड ऑयल आसमान छू रहा था, तब भी भारत ने 76 दिनों तक कीमतें नहीं बढ़ने दीं। इस दौरान IOCL, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों ने प्रतिदिन करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा सहा ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े। इसके अलावा, सरकार ने मार्च 2026 में एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की कटौती कर कीमतों को ₹100 के आसपास बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई थी।