Backrooms: इंटरनेट की रहस्यमयी और डरावनी दुनिया में सुकून ढूंढ रहे लोग, तेजी से बढ़ रहा अनंत खाली जगहों का ट्रेंड

Edited By Updated: 27 May, 2026 10:22 AM

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Backrooms: आजकल इंटरनेट पर एक नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें लोग Backrooms नाम की काल्पनिक और रहस्यमयी जगहों में घूमने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ये जगहें असल दुनिया में मौजूद नहीं होतीं, लेकिन फिर भी लोग इन्हें देखकर या इनके बारे में पढ़कर...

Backrooms: आजकल इंटरनेट पर एक नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें लोग Backrooms नाम की काल्पनिक और रहस्यमयी जगहों में घूमने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ये जगहें असल दुनिया में मौजूद नहीं होतीं, लेकिन फिर भी लोग इन्हें देखकर या इनके बारे में पढ़कर उनमें खो जाते हैं। इन जगहों को ऐसे खाली और डरावने माहौल के रूप में दिखाया जाता है, जैसे खाली पड़े ऑफिस ब्लॉक, पुराने बेसमेंट, लंबे और सुनसान गलियारे, और पीली रोशनी वाले कमरे। इन जगहों का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं होता, फिर भी ये लोगों को आकर्षित कर रहा है।

लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने इस विषय पर एक स्टडी की है। उनका कहना है कि पहले लोग Dark Tourism करते थे, जिसमें वे उन असली जगहों पर जाते थे जो मौत, त्रासदी या डरावनी ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी होती हैं। लेकिन Backrooms का ट्रेंड इससे अलग है, क्योंकि यह पूरी तरह डिजिटल और काल्पनिक दुनिया से जुड़ा है।

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शोधकर्ताओं के अनुसार यह इंटरनेट के उन हिस्सों से पैदा हुआ है जहां नियम कम होते हैं और कल्पनाएं ज्यादा होती हैं। उन्होंने इस नए चलन को Para-terrestrial dark tourism नाम दिया है। इसका मतलब है ऐसा अनुभव जो किसी असली जगह जैसा लगता है, लेकिन वास्तव में उसका कोई अस्तित्व नहीं होता। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक ऐसी खाली, अनंत और डरावनी काल्पनिक जगहों में समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इससे चिंता, अवसाद और अकेलापन बढ़ सकता है।

खासतौर पर युवा और संवेदनशील लोग अगर ज्यादा समय इन डिजिटल और खाली दुनिया जैसी जगहों में बिताते हैं, तो वे असल जिंदगी से दूर होने लगते हैं। इससे नींद की कमी, पढ़ाई या काम में ध्यान न लगना और जिम्मेदारियों से बचने की आदत जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

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“बैक-रूम्स” का मतलब है ऐसी खाली और अजीब जगहें जो जैसे पुराने ऑफिस, बेसमेंट या सुनसान गलियारों जैसी दिखती हैं। इनमें पीली रोशनी होती है, दीवारों पर पुराना वॉलपेपर लगा होता है और चारों तरफ गहरा सन्नाटा होता है, जिससे अपनी ही आवाज और धड़कन महसूस होने लगती है।

ये पूरी तरह एक ऑनलाइन बनाई गई liminal space यानि अधूरी और रहस्यमयी जगहों की अवधारणा है, जिसे लोग इंटरनेट पर तस्वीरों, वीडियो और कहानियों के रूप में साझा करते हैं।

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शोधकर्ताओं ने इस ऑनलाइन गतिविधि का अध्ययन किया, खासकर रेडिट के Backrooms समुदाय का, जिसमें 3.42 लाख से ज्यादा सदस्य हैं। उन्होंने वहां शेयर किए गए हजारों वीडियो, तस्वीरों, कहानियों, मीम्स और चर्चाओं का विश्लेषण किया। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि लोग इस तरह की काल्पनिक और डरावनी डिजिटल दुनिया की ओर क्यों आकर्षित हो रहे हैं और यह उनके व्यवहार को कैसे प्रभावित कर रहा है।


 

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