Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 May, 2026 01:30 PM

El Nino Alert: अल-नीनो एक बार फिर दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में दावा किया गया है कि यह जलवायु घटना सूखा बढ़ाकर कई देशों में हिंसा और सशस्त्र संघर्षों का खतरा बढ़ा देती है। 1950 से 2023 के बीच हुए 555...
El Nino Alert: अल-नीनो एक बार फिर दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी में दावा किया गया है कि यह जलवायु घटना सूखा बढ़ाकर कई देशों में हिंसा और सशस्त्र संघर्षों का खतरा बढ़ा देती है। 1950 से 2023 के बीच हुए 555 संघर्षों के विश्लेषण में पाया गया कि अल-नीनो के दौरान खासकर मध्य अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में हालात ज्यादा तनावपूर्ण हो जाते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पानी और भोजन की कमी, खराब होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी सामाजिक अस्थिरता को जन्म देती है, जो आगे चलकर लड़ाई-झगड़ों और हिंसा में बदल सकती है।
शोधकर्ताओं ने 1950 से 2023 के बीच दुनिया भर में हुए 555 सशस्त्र संघर्षों की स्टडी की। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर प्रशांत महासागर में बनने वाली जलवायु घटना अल नीनो (El Niño) के प्रभावों को समझने की कोशिश की। अल नीनो हर 3 से 7 साल में सक्रिय होता है और दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न को बदल देता है।
अल नीनो का प्रभाव
स्टडी में पाया गया कि जिन इलाकों में अल नीनो के कारण सूखा बढ़ा, वहां संघर्ष और हिंसा की घटनाओं में इजाफा देखने को मिला। खास तौर पर मध्य अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका जैसे इलाकों में यह असर ज्यादा स्पष्ट दिखाई दिया। शोधकर्ताओं का कहना है कि जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती, फसलें खराब हो जाती हैं, पानी की कमी बढ़ती है और लोगों की आजीविका प्रभावित होती है, तब सामाजिक तनाव तेजी से बढ़ सकता है।
स्टडी में यह भी बताया गया कि केवल सूखा ही नहीं, बल्कि मौसम में अचानक होने वाले बड़े बदलाव भी अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। इसके लिए रिसर्च में इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole) का भी विश्लेषण किया गया, जिसे कई बार Indian Nino कहा जाता है। यह जलवायु प्रणाली एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में कभी भारी बारिश तो कभी भीषण सूखे की स्थिति पैदा करती है।
रिसर्च के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया और हॉर्न ऑफ अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और गंभीर सूखे-दोनों परिस्थितियों में संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अचानक बदलते मौसम से पहले से कमजोर समाजों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ सकते हैं।
इस स्टडी की सह-लेखिका और राइस यूनिवर्सिटी की जलवायु वैज्ञानिक Silvia Dee ने कहा कि इंडियन ओशन डाइपोल बहुत तेजी से बदल सकता है। इससे Climate Whiplash जैसी स्थिति बनती है, जहां कम समय में मौसम में बेहद तेज बदलाव आते हैं। ऐसे हालात उन इलाकों में ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं जो पहले से आर्थिक या सामाजिक संकट से जूझ रहे हों।
यह रिसर्च जर्नल Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित हुई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन से सरकारों, राहत एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में जलवायु संकट भविष्य में संघर्ष का कारण बन सकता है।
वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में एक नया और शक्तिशाली अल नीनो विकसित हो सकता है। कुछ मौसम पूर्वानुमानों के मुताबिक, यह हाल के वर्षों के सबसे मजबूत अल नीनो घटनाओं में शामिल हो सकता है। ऐसे में दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, गर्मी और मौसम संबंधी चरम घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।