Edited By Purnima Singh,Updated: 29 Mar, 2026 11:17 AM

असम की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी के चलते सुर्खियों में है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने राज्य की सत्ता परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि असम में...
National Desk : असम की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी के चलते सुर्खियों में है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने राज्य की सत्ता परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि असम में भाजपा के उभार के पीछे कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व के फैसले बड़ी वजह रहे।
राजनीति में एंट्री से ही चुनौती बने अजमल
अजमल ने एक बातचीत के दौरान कहा कि जब उनकी पार्टी ने 2005 में राजनीति में कदम रखा, तब से ही उन्हें एक चुनौती के रूप में देखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय की कांग्रेस सरकार को अल्पसंख्यक वोटों की जरूरत थी, लेकिन बाद में उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की गई। इसके बावजूद AIUDF ने अपना जनाधार बढ़ाया और 2011 में राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
BJP की जीत के आरोपों को किया खारिज
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को भाजपा की जीत के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। उनके अनुसार, 2011 के चुनाव में कांग्रेस ने भी सीटें बढ़ाईं, जिससे यह साबित होता है कि दोनों दलों का जनाधार अलग-अलग था। अजमल का आरोप है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर हुए मतभेद, खासकर तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और अन्य नेताओं के बीच खींचतान, भाजपा को मजबूत करने का कारण बनी।
कांग्रेस की रणनीति पर उठाए सवाल
अजमल ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस ने उस समय सही रणनीति अपनाई होती और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता दी होती, तो भाजपा इतनी मजबूती से सत्ता में नहीं आ पाती। उन्होंने राहुल गांधी और तरुण गोगोई के फैसलों को इस राजनीतिक बदलाव के लिए जिम्मेदार ठहराया।
ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप
भाजपा द्वारा उनके नाम का इस्तेमाल कर डर का माहौल बनाने के सवाल पर अजमल ने कहा कि उन्हें जानबूझकर एक “खतरे” के रूप में पेश किया जाता है, ताकि राजनीतिक ध्रुवीकरण किया जा सके। उन्होंने राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक रणनीतिक खिलाड़ी बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने इसी डर को राजनीतिक हथियार बनाया।
AIUDF की प्रासंगिकता पर भरोसा कायम
2024 के लोकसभा चुनाव और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बावजूद अजमल ने अपनी पार्टी की प्रासंगिकता पर भरोसा जताया। उनका कहना है कि AIUDF आज भी राज्य की राजनीति में मजबूत स्थिति बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती जा रही है। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि कांग्रेस अब भाजपा के प्रभाव में काम कर रही है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अलग रुख
अजमल ने यह भी साफ किया कि राष्ट्रीय स्तर पर वे राहुल गांधी के साथ हैं, लेकिन असम में कांग्रेस के साथ उनकी राहें अलग हैं। उनका कहना है कि राज्य की राजनीति में एक नए विकल्प की जरूरत है, और उनकी पार्टी उसी दिशा में काम कर रही है।