Basant Panchami 2026:बसंत पंचमी पर क्यों पहनते हैं पीले कपड़े? जानिए इसके पीछे का रहस्य

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 04:42 PM

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बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और अत्यंत पवित्र त्योहार है, जो वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है। यह दिन ज्ञान, बुद्धि, कला, संगीत और शिक्षा की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।

नेशनल डेस्क: बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और अत्यंत पवित्र त्योहार है, जो वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करता है। यह दिन ज्ञान, बुद्धि, कला, संगीत और शिक्षा की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां सरस्वती का अवतार हुआ था, इसलिए इसे सरस्वती जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

यह पर्व विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों, लेखकों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पूरे देश में मंदिरों, स्कूलों, कॉलेजों और घरों में उत्साह के साथ सरस्वती पूजा की जाती है, साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम, किताबों की पूजा और नई शिक्षा की शुरुआत जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं।

बसंत पंचमी 2026 की तिथि और समय

साल 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, रात 02:28 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, रात 01:46 बजे

उदय तिथि के आधार पर मुख्य रूप से 23 जनवरी को ही यह पर्व मनाया जाएगा।

शुभ  मुहूर्त 

  • सर्वश्रेष्ठ समय सरस्वती पूजा के लिए सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा (लगभग 5 घंटे 20 मिनट)। 
  • कुछ स्थानों पर यह मुहूर्त 07:15 AM से 12:50 PM तक भी बताया जा रहा है। 

मध्याह्न काल दोपहर 12:33 बजे के आसपास होता है। पूजा हमेशा दिन के समय में ही करें, और स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें क्योंकि थोड़े अंतर क्षेत्रीय हो सकते हैं।

पीले रंग का विशेष महत्व 

बसंत पंचमी की सबसे प्रमुख पहचान पीला रंग है, जिसे इस त्योहार का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं, पीले फूलों से पूजा करते हैं और पीले रंग के व्यंजन प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं। घर-मंदिरों की सजावट में पीली रंगोली, पीले फूल और पीले कपड़े प्रमुखता से दिखते हैं।

पीला रंग क्यों है इतना शुभ?

पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि, नई शुरुआत और आशावाद का प्रतीक है। वसंत ऋतु में सरसों के खेतों में खिले पीले फूल प्रकृति में नई चेतना और उल्लास का संदेश देते हैं। यही कारण है कि पीला बसंत का प्राकृतिक रंग बन गया। मां सरस्वती से जुड़कर यह रंग बुद्धि, स्पष्टता और रचनात्मकता को भी दर्शाता है।

पीले वस्त्र पहनने की परंपरा

धार्मिक मान्यता है कि बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करने से मां सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। यह परंपरा प्रकृति के साथ सामंजस्य और देवी के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। छात्र-छात्राएं और कलाकार विशेष रूप से पीले कपड़े पहनकर ज्ञान, एकाग्रता और सफलता की प्रार्थना करते हैं।

देवी सरस्वती और पीले रंग का गहरा संबंध

पीला रंग मां सरस्वती की कृपा, शुद्ध बुद्धि और स्पष्ट विचारों का प्रतीक माना जाता है। पूजा में पीले फूल (जैसे गेंदा या अन्य पीले फूल) चढ़ाने और पीले वस्त्र पहनने से शिक्षा, कला, संगीत और करियर में उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।

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