Edited By Sanjeev,Updated: 22 Sep, 2026 12:02 PM

पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन प्राइमरी स्कूल शिक्षकों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई करें जो बिना इजाजत अनुपस्थित रहते हैं या तय नियमों का पालन किए बिना छुट्टी लेते हैं। यह निर्देश 21 सितंबर को...
कोलकाता : पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे उन प्राइमरी स्कूल शिक्षकों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई करें जो बिना इजाजत अनुपस्थित रहते हैं या तय नियमों का पालन किए बिना छुट्टी लेते हैं। यह निर्देश 21 सितंबर को विकास भवन से एक अधिसूचना के जरिए जारी किया गया। यह कदम इस चिंता के बीच उठाया गया है कि शिक्षकों की लंबे समय तक बिना इजाजत अनुपस्थिति से सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नियमित शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
विभाग ने सभी जिला प्राइमरी स्कूल निरीक्षकों (DI) से कहा है कि वे लंबित छुट्टी आवेदनों और बिना पूर्व मंजूरी के अनुपस्थिति के मामलों की जांच करें। DI को निर्देश दिया गया है कि वे परिस्थितियों की जांच करें और यह तय करें कि अनुपस्थिति उचित थी या नहीं। निर्देश के अनुसार उन मामलों में छुट्टी मंजूर की जा सकती है जहां कोई शिक्षक बिना पूर्व मंजूरी के अनुपस्थित रहा हो, लेकिन ऐसा करने का कोई वास्तविक या आपातकालीन कारण बता सके। हालांकि अगर शिक्षक कोई वैध कारण नहीं बता पाता है या अनुपस्थिति जानबूझकर की गई पाई जाती है, तो छुट्टी मंजूर नहीं की जाएगी।
ऐसे मामलों में विभाग ने आदेश दिया है कि शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए और जहां लागू हो, वहां कानूनी कार्रवाई भी की जाए। विभाग ने जिला अधिकारियों को उन शिक्षकों के मामलों की भी जांच करने का निर्देश दिया है जो कथित तौर पर विभिन्न कार्यक्रमों और आंदोलनों में भाग लेने के दौरान अनुपस्थित रहे हैं जिनमें महंगाई भत्ता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं और जिन्होंने नियमों के अनुसार छुट्टी नहीं ली थी।
अधिकारियों ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना और शिक्षण का माहौल बनाए रखना है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में इन निर्देशों को तुरंत लागू करने का आदेश दिया है। हर जिले को लंबित छुट्टी के मामलों और बिना इजाजत अनुपस्थिति की घटनाओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी, साथ ही नवीनतम निर्देश के बाद की गई कार्रवाई का विवरण भी देना होगा। ये रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर विकास भवन में स्कूल शिक्षा आयुक्त के कार्यालय में जमा करनी होंगी।