Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 Sep, 2026 07:29 AM

बेंगलुरु में कैंसर और जीवन रक्षक (Life-saving) दवाओं के एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर शहर के...
बेंगलुरु : बेंगलुरु में कैंसर और जीवन रक्षक (Life-saving) दवाओं के एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर शहर के 90 से अधिक अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर्स में नकली और रीपैकेज्ड दवाएं सप्लाई कर रहा था।
बेंगलुरु पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट की संयुक्त जांच के बाद फार्मेसी के मालिक वीरेश कुमार जैन को गिरफ़्तार किया गया है, जिन पर इस नेटवर्क का हिस्सा होने का शक है। अधिकारियों द्वारा मिनर्वा सर्कल के पास कृपा हेल्थकेयर पर छापेमारी करने और बड़ी मात्रा में नकली होने की आशंका वाली दवाएं बरामद करने के बाद जांच तेज़ हो गई। जांचकर्ताओं को शक है कि यह नेटवर्क अस्पतालों, क्लीनिकों और मेडिकल दुकानों को कैंसर की दवाएं, जीवन रक्षक दवाएं और ICU इंजेक्शन सप्लाई करता था और कथित तौर पर उन्हें लगभग 50 प्रतिशत की छूट पर बेचता था।
एक्सपायर्ड दवाओं की रीपैकेजिंग
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस रैकेट में कथित तौर पर कम कीमत पर दवाएं खरीदना, उन्हें अलग-अलग नामों से रीब्रांड करना और ज़्यादा कीमतों पर बेचना शामिल था। अधिकारियों को यह भी शक है कि एक्सपायर्ड दवाओं को नए कंटेनरों में रीपैकेज किया जाता था और उन पर नकली लेबल लगाए जाते थे, जिनमें से कुछ कथित तौर पर जानी-मानी फार्मास्युटिकल कंपनियों की ब्रांडिंग जैसे दिखते थे।
माना जा रहा है कि कृपा हेल्थकेयर की जगह का इस्तेमाल स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट के तौर पर किया जाता था, जहां से दवाएं कथित तौर पर मेडिकल दुकानों, अस्पतालों और क्लीनिकों को भेजी जाती थीं। पुलिस यह पता लगा रहे हैं कि क्या इस संदिग्ध रैकेट का कोई अंतर-राज्यीय नेटवर्क था। 15 से ज़्यादा मेडिकल प्रतिनिधियों पर दवाओं के ट्रांसपोर्टेशन या डिस्ट्रीब्यूशन में मदद करने का शक है। पुलिस के संयुक्त आयुक्त (पश्चिम) और SIT के प्रमुख वामसी कृष्णा ने कहा कि नेटवर्क के पूरे दायरे का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस जांच के दौरान ज़ब्त किए गए बैंक ट्रांज़ैक्शन, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि दवाओं की आवाजाही और पैसे के लेन-देन का पता लगाया जा सके।
पुलिस को शक है कि वीरेश कुमार लगभग पांच साल से यह फर्म चला रहे थे। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि उनका संबंध प्रशांत से था, जिसे उन्होंने मुख्य आरोपी और नेटवर्क का संदिग्ध सरगना बताया है। प्रशांत अभी फ़रार है और पुलिस टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। इस मामले में अभी तक सिर्फ़ वीरेश कुमार को ही गिरफ़्तार किया गया है।
5 करोड़ रुपये की नकली दवाएं ज़ब्त
यह जांच 18 अगस्त को बेंगलुरु दक्षिण ज़िले के बिदादी और डोड्डरी इलाकों में एक फार्महाउस पर की गई छापेमारी से जुड़ी है, जहां अधिकारियों ने लगभग 5 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली दवाएं ज़ब्त की थीं। ज़ब्त की गई चीज़ों में नकली इनवॉइस, इंजेक्शन भरने वाले उपकरण और नकली लेबल भी शामिल थे। छापेमारी के बाद, जांचकर्ताओं ने जांच का दायरा बढ़ाया और कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में 10 से ज़्यादा जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद जांच में अधिकारियों को कृपा हेल्थकेयर और वीरेश कुमार के बारे में पता चला। SIT और ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट अब उन अस्पतालों और अन्य मेडिकल संस्थानों की पहचान करने के लिए काम कर रहे हैं जिन्हें ये संदिग्ध नकली दवाएं मिली हो सकती हैं, और इस पूरे ऑपरेशन के दायरे का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।