Edited By Anu Malhotra,Updated: 21 Sep, 2026 07:52 AM

कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी के बाद नक़ली दवाओं के कारोबार का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के तहत नियामक प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए 16 ड्रग लाइसेंस पूरी तरह रद्द...
बेंगलुरु: कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी के बाद नक़ली दवाओं के कारोबार का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के तहत नियामक प्राधिकरण ने कार्रवाई करते हुए 16 ड्रग लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए हैं, जबकि 8 अन्य लाइसेंसों को निलंबित कर दिया है।
फार्महाउस में चल रही थी नक़ली दवाओं की रीपैकिंग
FDA की ड्रग एनफोर्समेंट विंग ने 18 अगस्त 2026 को कुुरुबारकेरहल्ली (बिदादी) स्थित एक फार्महाउस पर छापा मारा था। जांच में सामने आया कि वहां बिना किसी लाइसेंस के दवाओं की रीपैकिंग और रीलेबलिंग का काम चल रहा था। मौके से लगभग 5.05 करोड़ रुपये मूल्य की नक़ली और एक्सपायर्ड दवाएं, रीपैकिंग मशीनें और छपाई सामग्री बरामद की गई।
सस्ती दवाओं को फाइजर जैसे बड़े ब्रांड्स के नाम पर बेचने का खेल
कर्नाटक सरकार के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चला है कि पड़ोसी राज्यों से कम कीमत वाली साधारण और जेनेरिक दवाएं मंगवाई जाती थीं। इसके बाद फार्महाउस में उन्हें नई शीशियों (Vials) में भरकर फाइजर (Pfizer) जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के महंगे और प्रीमियम ब्रांड्स के फर्जी लेबल लगा दिए जाते थे।
ज़ब्त की गई प्रमुख दवाएं
ज़ब्त किए गए स्टॉक में CEFIAVIGENT 2.5 इंजेक्शन की 5,640 शीशियां (कीमत लगभग 3.38 करोड़ रुपये) और HIZLAM इंजेक्शन की 1,531 शीशियां (कीमत लगभग 52.24 लाख रुपये) शामिल थीं।
हैरानी की बात यह है कि जालसाजों ने दवाओं की शीशियों पर फर्जी QR कोड भी प्रिंट कर रखे थे, ताकि ग्राहक आसानी से धोखा खा जाएं। हालांकि, जांच टीम द्वारा स्कैन करने पर ये कोड पूरी तरह से फर्जी पाए गए।
अधिकारियों ने लगभग 35 लाख रुपये की एक्सपायर्ड दवाएं, साथ ही अन्य इंजेक्शन, फिलिंग मशीनरी, नकली लेबल और स्टैम्प भी ज़ब्त किए। ज़ब्त किए गए सामान में एक्सपायर्ड दवाओं के 30 बॉक्स भी शामिल थे।
SIT का गठन
प्रशासन ने बेंगलुरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला तालुक स्थित M/s Pfizer C&F Depot का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया है। बाजार में इन खतरनाक दवाओं की बिक्री रोकने के लिए राज्य के FDA पोर्टल पर संबंधित बैच नंबरों को तुरंत ब्लॉक कर दिया गया है। ज़ब्त की गई दवाओं के नमूनों को रासायनिक संरचना, नसबंदी (Sterility) और प्रभावशीलता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो यह पता लगा रहा है कि ये दवाएं कहां से आती थीं और इन्हें किन-किन अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाया गया था।
उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान
मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) की धारा 17B (स्पूरियस ड्रग्स) और धारा 27 के तहत आपराधिक केस दर्ज किया गया है। कानून के तहत नक़ली दवाओं का निर्माण या वितरण करने पर कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
कंज्यूमर्स को सलाह
FDA ने कंज्यूमर्स को सलाह दी है कि वे दवाएं, खासकर जीवन रक्षक दवाएं, सिर्फ़ लाइसेंस वाली फार्मेसी से और वैलिड टैक्स इनवॉइस के साथ ही खरीदें। इसने लोगों से यह भी अपील की है कि वे पैकेजिंग में संदिग्ध बदलाव और दवा के लेबल पर काम न करने वाले QR या स्कैनिंग कोड की जानकारी ड्रग एनफोर्समेंट अधिकारियों को दें।