Edited By Pardeep,Updated: 22 May, 2026 06:04 AM

आगामी बकरीद के त्योहार से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने पशु बलि और धार्मिक परंपराओं को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
कोलकाता: आगामी बकरीद के त्योहार से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने पशु बलि और धार्मिक परंपराओं को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि गाय की कुर्बानी किसी भी धार्मिक परंपरा या बकरीद के त्योहार का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया है, जिसमें पशु बलि पर कड़े नियम लागू किए गए थे।
खुले में कुर्बानी पर रहेगी पूरी पाबंदी
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि राज्य सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए पशु बलि को सीमित कर सकती है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अब से सड़कों, गलियों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पशुओं का वध या कुर्बानी नहीं दी जा सकेगी। इसके लिए सरकार द्वारा केवल नामित और सुरक्षित स्थानों का ही उपयोग करने की अनुमति होगी।
सर्टिफिकेट के बिना नहीं मिलेगी अनुमति
बंगाल सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन और 'पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950' के तहत अब पशु बलि के लिए नियम और भी कड़े कर दिए गए हैं:
- मेडिकल जांच: किसी भी पशु के वध से पहले उसकी सख्त मेडिकल जांच करानी होगी।
- फिट सर्टिफिकेट: केवल उन्हीं पशुओं की बलि दी जा सकेगी जिनके लिए अधिकृत अधिकारियों से 'फिट सर्टिफिकेट' प्राप्त किया गया हो। बिना सर्टिफिकेट के बलि पर पूर्ण रोक रहेगी।
- कानूनी कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार और केंद्र के वकीलों ने इन नियमों का समर्थन करते हुए कोर्ट में कहा है कि यह नोटिफिकेशन 1950 के कानून के तहत पूरी तरह से वैध और सही है।