'शिक्षा अधिकारियों के बच्चे भी पढ़ें सरकारी स्कूलों में', अभिजीत दीपके की बड़ी मांग

Edited By Updated: 19 Aug, 2026 01:35 AM

children of education officers should also study in govt schools  abhijeet

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण छात्रों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में विफल रहने पर...

हिंगोलीः कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण छात्रों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में विफल रहने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की।

पिछले सप्ताह 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत करने वाले दीपके ने कहा कि मंत्रियों और नेताओं को भी कम से कम एक दिन अपने बच्चों को गांव के स्कूलों में भेजना चाहिए, ताकि वे उन ग्रामीण छात्रों की चुनौतियों को समझ सकें, जिन्हें शिक्षा हासिल करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

अपने गृह जिले हिंगोली के लिम्बाला में पत्रकारों से बातचीत में दीपके ने हिंगोली से लोकसभा चुनाव लड़ने की योजना के बारे में सवाल पर सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि अगर सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधरती है, तो उनके पास चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचेगा। इससे पहले दीपके ने गांव के एक जिला परिषद स्कूल के प्रधानाध्यापक का वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वह कथित तौर पर शराब पीकर कक्षा में सोते हुए नजर आ रहे थे। कॉजपा नेता ने कहा कि अधिकारियों ने मंगलवार को शिक्षक को निलंबित कर दिया, लेकिन जब तक उनकी जगह नए शिक्षक की नियुक्ति नहीं हो जाती, वह गांव नहीं छोड़ेंगे।

उन्होंने कहा, ''इस स्कूल में चार शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन यहां केवल दो शिक्षक हैं। इसलिए दो और शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। मैं आने वाले दिनों में चार-पांच अन्य स्कूलों का भी दौरा करने वाला हूं।'' दीपके ने दावा किया कि ग्रामीणों ने दो साल पहले ही प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग की थी, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने सवाल किया, ''इन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए... अगर किसी शिक्षा अधिकारी की बेटी के सामने कोई शिक्षक देशी शराब पीकर सो जाए, तो क्या ये अधिकारी इसे बर्दाश्त करेंगे?''

कॉजपा नेता ने कहा, ''सरकारी स्कूलों को सुचारु रूप से चलाना और यह सुनिश्चित करना इन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वहां पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हों। उनके बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं और वे अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं...इन अधिकारियों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ना अनिवार्य किया जाना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि इससे सरकारी स्कूलों की स्थिति में व्यापक सुधार आएगा। दीपके ने कहा, ''लोग अब सवाल पूछ रहे हैं, क्योंकि वे अपने बच्चों की शिक्षा और रोजगार को लेकर चिंतित हैं। वे जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठ चुके हैं।'' दीपके ने कहा कि अगर नेता सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने में विफल रहे, तो लोग उन्हें वोट नहीं देंगे।

हिंगोली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी को लेकर चर्चाओं के बारे में सवाल पर उन्होंने कहा, ''अगर सरकार सभी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधार देती है, तो अभिजीत दीपके के पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचेगा।'' दीपके ने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार हो, क्योंकि अगर गरीबों के बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करेंगे तो इससे आज के नेताओं की अगली पीढ़ी को चुनाव जीतने में मदद नहीं मिलेगी। इससे पहले, दीपके ने हिंगोली में स्कूल से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि नेता चुनावी रैलियों के लिए बसों और ट्रेन का इंतजाम कर सकते हैं, लेकिन गरीब छात्रों के लिए एक बस तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राजनीतिक बहस ने लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांट दिया, जबकि शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं।

दीपके ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में बच्चों को अक्सर स्कूल पहुंचने के लिए सात से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खासकर मानसून के दौरान सड़कों पर कीचड़ और जलभराव होने से बच्चों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा, ''मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को अपने बच्चों को एक दिन के लिए गांव के स्कूलों में भेजना चाहिए और उन्हें ग्रामीण बच्चों की तरह पैदल स्कूल जाने देना चाहिए। तब वे समझ पाएंगे कि इन बच्चों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।'' दीपके ने कहा, ''आदिवासी बच्चे का जीवन भी उतना ही अनमोल है, जितना किसी मंत्री के बच्चे के जीवन का है। उस बच्चे का जीवन किसी भी मायने में कम महत्वपूर्ण नहीं है।'' 

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