सरकार और Meta के बीच मीटिंग का दौर, भारतीय कानून का सख्ती से पालन की हिदायत

Edited By Updated: 06 Aug, 2026 07:21 PM

series of meetings between the government and meta

भारत सरकार और Meta के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और भारतीय कानूनों के अनुपालन को लेकर बातचीत का दौर तेज़ हो गया है।

नई दिल्ली: भारत सरकार और Meta के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और भारतीय कानूनों के अनुपालन को लेकर बातचीत का दौर तेज़ हो गया है। Meta की ग्लोबल टीम फिलहाल भारत में ही रहेगी और केंद्र सरकार के साथ अगले कुछ दिनों में कई अहम बैठकें करेगी। इन बैठकों का मुख्य फोकस यह रहेगा कि WhatsApp समेत Meta के सभी प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं या नहीं।

केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक

गुरुवार को Meta के वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। बैठक के बाद अधिकारियों को मंत्री के दफ़्तर से निकलते हुए देखा गया। खबर है कि आने वाले दिनों में 3 से 4 और बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

कानूनों को लेकर सरकार सख्त

सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारत में संचालित होने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों के तहत ही काम करेंगे। इस दौरान यह भी परखा जाएगा कि Meta के प्लेटफॉर्म्स की नीतियां और कार्यप्रणाली भारतीय कानूनी ढांचे के अनुरूप हैं या नहीं। चर्चा है कि आगामी बैठकों में प्लेटफॉर्म से जुड़े तकनीकी विवरण, सिस्टम लॉग्स और कंटेंट मॉडरेशन से संबंधित प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा सकती है।

CSAM और डीपफेक मामलों पर माफी

इस बीच Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग ने CSAM कंटेंट, डीपफेक और प्लेटफॉर्म मॉडरेशन से जुड़े मामलों में हुई कमियों को लेकर भारत सरकार से माफ़ी मांगी है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि इन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और वह आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर संसाधन और पैसा खर्च किया गया था। कंपनी ने इस पर अफ़सोस जताते हुए कहा कि वह अपनी नीतियों और प्रक्रियाओं में सुधार की दिशा में काम कर रही है।

'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर भी उठे सवाल

बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने Meta के "इंटरमीडियरी" होने के दावे पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि यदि कोई प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किस उपयोगकर्ता तक पहुंचे, तो उसकी भूमिका केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ की नहीं रह जाती। ऐसे में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली "सेफ हार्बर" सुरक्षा के दावे की भी समीक्षा की जानी चाहिए।

आगे भी जारी रहेगा बातचीत का दौर

भारत सरकार और मेटा के बीच आने वाले दिनों में कई और दौर की बातचीत होने की संभावना है। इन बैठकों में भारतीय कानूनों के अनुपालन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और तकनीकी प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि इन बैठकों के नतीजे भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन और जवाबदेही के लिहाज़ से अहम साबित हो सकते हैं।

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