Edited By Anu Malhotra,Updated: 26 Aug, 2026 07:56 AM

बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन देना या उन्हें घंटों स्क्रीन के सामने बैठाना उनके मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। एक नई स्टडी के अनुसार, बहुत कम उम्र में बच्चों को स्क्रीन का एक्सेस देने से उनके सीखने और चीज़ों को याद रखने...
नई दिल्ली: बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन देना या उन्हें घंटों स्क्रीन के सामने बैठाना उनके मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। एक नई स्टडी के अनुसार, बहुत कम उम्र में बच्चों को स्क्रीन का एक्सेस देने से उनके सीखने और चीज़ों को याद रखने की क्षमता पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
'वर्ल्ड जर्नल ऑफ़ पीडियाट्रिक्स' में प्रकाशित इन्सेर्म और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर की एक स्टडी में 502 बच्चों का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों ने 1 साल और 6 साल की उम्र के दौरान स्क्रीन पर अधिक समय बिताया, 9 से 10.5 साल की उम्र तक आते-आते उनका पढ़ाई-लिखाई में प्रदर्शन खराब रहा और उनकी वर्किंग मेमोरी भी काफी कमजोर पाई गई।
स्टडी में पाया गया कि जिन बच्चों ने खासकर 1 साल की उम्र में, स्क्रीन देखने में ज़्यादा समय बिताया, उनमें बाद में पढ़ाई-लिखाई में खराब परफॉर्मेंस और कमज़ोर वर्किंग मेमोरी होने की संभावना ज़्यादा थी। लगभग 6 साल की उम्र के बच्चों में स्क्रीन का इस्तेमाल भी खराब नतीजों से जुड़ा था, जिससे पता चलता है कि स्क्रीन टाइम के मामले में बचपन और स्कूल के शुरुआती साल खास तौर पर अहम हो सकते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब बच्चे स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं, तो उनके पास खेलने, किताबें पढ़ने और माता-पिता से बातचीत करने जैसी जरूरी गतिविधियों के लिए समय नहीं बचता, जो उनके दिमागी विकास के लिए आवश्यक हैं।
इससे पहले भी 2020 में, यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलगरी में शेरी मैडिगन की अगुवाई में रिसर्चर्स ने 18,905 बच्चों से जुड़ी 42 स्टडीज़ की समीक्षा की.. इस रिसर्च से सामने आया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों का Language Skills पिछड़ जाता है। वहीं, फ्रांस के शोधकर्ताओं की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि कम उम्र में स्क्रीन का ज्यादा उपयोग बच्चों में भविष्य में ध्यान भटकने और एकाग्रता की कमी का कारण बनता है।