कैबिनेट विस्तार के फॉर्मूले में फंसी कांग्रेस, संतुलन बैठाने में जुटा हाईकमान

Edited By Updated: 26 Jul, 2026 03:00 PM

congress stuck in cabinet expansion formula high command busy in balancing

कर्नाटक में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम फैसला लेने के लिए कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह तैयार है और लगभग 20 मंत्री पदों के लिए कांग्रेस के 60 से अधिक विधायक होड़ में हैं। इस राजनीतिक रस्साकशी में मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और पूर्व...

नेशनल डेस्क: कर्नाटक में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम फैसला लेने के लिए कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह तैयार है और लगभग 20 मंत्री पदों के लिए कांग्रेस के 60 से अधिक विधायक होड़ में हैं। इस राजनीतिक रस्साकशी में मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया अपने-अपने पसंदीदा विधायकों का समर्थन कर रहे हैं, जो पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को नया रूप दे सकता है। नयी दिल्ली में मंगलवार को होने वाली एक बैठक में कांग्रेस नेतृत्व नए मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दे सकता है। इस बैठक में शिवकुमार और सिद्दारमैया, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के सामने अपने-अपने दावेदारों के नाम रख सकते हैं। मंत्रिमंडल का यह विस्तार पार्टी के लिए एक बेहद नाजुक संतुलन साधने की जद्दोजहद बन गया है।

वरिष्ठ विधायकों और नए चेहरों के बीच तालमेल बैठाने पर जोर 
पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय, जातीय और पीढ़ीगत प्रतिनिधित्व को बनाए रखते हुए दो मुख्य गुटों के दावों को संभालने की कोशिश कर रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ विधायकों को नाराज किए बिना नए चेहरों को शामिल करने की है, जो सरकार बनने के बाद से ही मंत्री पद का इंतजार कर रहे हैं। समझा जाता है कि राहुल गांधी युवा विधायकों और पहली बार के विधायकों को अधिक मौका देने के पक्ष में हैं, जो नया नेतृत्व तैयार करने की पार्टी की व्यापक रणनीति को दर्शाता है। यह भी उम्मीद है कि विस्तारित मंत्रिमंडल में महिलाओं को पर्याप्त स्थान दिया जाएगा, जिसमें कम से कम दो महिला विधायकों को जगह मिल सकती है।

जातीय समीकरण को साधने की कोशिश 
अंतिम चयन में जातीय समीकरण भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अपने सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखने के लिए लिंगायत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और वोक्कालिगा समुदाय को साधने पर विचार कर रही है। प्रभावशाली समुदायों और वरिष्ठ नेताओं को साधने के लिए अतिरिक्त उपमुख्यमंत्री पद की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक गलियारों में सतीश जारकीहोली, एम. बी. पाटिल और बी. के. हरिप्रसाद जैसे नामों की चर्चा है, लेकिन पार्टी ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

अगस्त के पहले हफ्ते में शुरू हो रहा है विधानसभा सत्र
मंत्रिमंडल विस्तार के इस घटनाक्रम के बीच शिवकुमार की नयी दिल्ली में कर्नाटक के सांसदों के साथ बैठक का भी राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह बैठक महादायी और कलासा-बंदूरी जैसी रुकी हुई केंद्रीय परियोजनाओं पर चर्चा के लिए बुलाई गई है, लेकिन इसके समय को देखते हुए माना जा रहा है कि इसमें मंत्रिमंडल विस्तार पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। यदि आलाकमान नामों को मंजूरी दे देता है, तो अगस्त के पहले हफ्ते में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र से पहले बुधवार को नए मंत्री शपथ ले सकते हैं। इस विस्तार पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सत्ता के संतुलन और गुटबाजी से निपटने की आलाकमान की रणनीति का साफ संकेत मिलेगा।

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