Edited By Mansa Devi,Updated: 08 Feb, 2026 12:13 PM

तांबे की कीमतों ने हाल ही में बीते 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस तेज़ी के बाद निवेशकों के बीच यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या कॉपर यानी ‘रेड गोल्ड’ भविष्य में सोने जैसा मजबूत निवेश विकल्प बन सकता है।
नेशनल डेस्क: तांबे की कीमतों ने हाल ही में बीते 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस तेज़ी के बाद निवेशकों के बीच यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या कॉपर यानी ‘रेड गोल्ड’ भविष्य में सोने जैसा मजबूत निवेश विकल्प बन सकता है। अर्थव्यवस्था की सेहत बताने वाले इस धातु को ‘डॉक्टर कॉपर’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी मांग और कीमतें वैश्विक विकास की रफ्तार को दर्शाती हैं।
तेजी के पीछे क्या हैं असली वजहें
तांबे में आई इस रिकॉर्ड तेजी के पीछे तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं। पहला कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर की बढ़ती मांग है। एक सामान्य पेट्रोल या डीज़ल कार के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहन में लगभग चार गुना ज्यादा तांबे की जरूरत होती है। वहीं, AI के लिए बन रहे बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स को बिजली सप्लाई देने के लिए भी भारी मात्रा में कॉपर का इस्तेमाल हो रहा है। दूसरा बड़ा कारण सप्लाई की कमी है। पनामा और पेरू जैसे देशों में बड़ी खदानों के बंद होने या उत्पादन घटने से वैश्विक बाजार में तांबे की उपलब्धता कम हुई है। तीसरी वजह ग्रीन एनर्जी की बढ़ती जरूरत है। सोलर पैनल और विंड टर्बाइन के निर्माण में तांबा एक जरूरी कच्चा माल है, और दुनिया तेजी से क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है।
क्या कॉपर ले सकता है सोने की जगह?
इस सवाल का सीधा जवाब है। कॉपर सोने को पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर सकता, लेकिन यह एक मजबूत वैकल्पिक निवेश जरूर बन रहा है। सोना जहां अनिश्चितता और महंगाई के दौर में सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं तांबा एक औद्योगिक धातु है, जिसकी कीमतें वैश्विक निर्माण और विकास गतिविधियों पर निर्भर करती हैं। सोना संकट के समय बचाव की भूमिका निभाता है, जबकि कॉपर विकास के दौर में रिटर्न देता है। इसलिए दोनों की प्रकृति अलग है और दोनों का निवेश में उद्देश्य भी अलग रहता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत देता है कॉपर का उछाल
निवेशकों के लिहाज से कॉपर को एक ग्रोथ एसेट माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में जब दुनिया नेट-जीरो और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ेगी, तब तांबे की मांग लंबे समय तक बनी रह सकती है। हालांकि, इसमें उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में कहीं ज्यादा होता है, इसलिए इसमें निवेश करते समय जोखिम को समझना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉपर को पोर्टफोलियो में सोने के साथ संतुलन बनाकर रखना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।
कॉपर की तेजी से किन कंपनियों को मिल रहा फायदा
तांबे की कीमतों में आई तेजी का सबसे ज्यादा फायदा उन कंपनियों को मिल रहा है जो या तो सीधे तांबे का खनन करती हैं या फिर इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं। भारत में हिंदुस्तान कॉपर जैसी कंपनियां, जिनके पास अपनी खदानें हैं, कीमत बढ़ने पर सीधे लाभ में आती हैं। वहीं, वेदांता जैसी कंपनियों का भी ग्लोबल स्तर पर तांबे के कारोबार में बड़ा दखल है। इसके अलावा केबल और वायर बनाने वाली कंपनियां, जैसे पॉलीकैब, KEI और फिनोलेक्स केबल्स, बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजली परियोजनाओं से लाभ कमा रही हैं।
निवेश से पहले जोखिम को समझना जरूरी
कॉपर से जुड़े शेयरों को कमोडिटी स्टॉक्स माना जाता है, यानी इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। अगर वैश्विक स्तर पर मांग कमजोर हुई या कीमतों में अचानक गिरावट आई, तो इन शेयरों में भी तेज गिरावट देखी जा सकती है। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय लंबी अवधि की सोच और सही संतुलन के साथ फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।