20 साल बाद लौटीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा; मोदी सरकार की जमकर की तारीफ, बोलीं-अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास करती है भाजपा

Edited By Updated: 02 Aug, 2026 08:02 PM

current govt of india believes in freedom of speech  taslima nasreen

करीब 20 साल बाद कोलकाता लौटीं बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि भारत की मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा राजनीतिक नहीं है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के समर्थन के...

International Desk: बांग्लादेश की चर्चित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तसलीमा नसरीन लगभग दो दशक बाद कोलकाता लौटी हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करती है। उन्होंने अपने पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग सरकारों में उनके साथ अलग व्यवहार हुआ। प्रेस कॉन्फ्रेंस में तसलीमा नसरीन ने कहा, "एक सरकार ने मुझे कोलकाता छोड़ने पर मजबूर किया, दूसरी सरकार ने लौटने नहीं दिया और अब एक सरकार ने मेरा स्वागत किया है। मुझे खुशी है। मेरा मानना है कि भारत की मौजूदा मोदी सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास करती है।"

 

2007 में छोड़ना पड़ा था कोलकाता
तसलीमा नसरीन को वर्ष 2007 में उनके लेखन और पुस्तक 'द्विखंडित' को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था। तब से यह उनकी पहली सार्वजनिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था, फिर भी उन्हें शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा, "मैंने किसी की हत्या नहीं की थी। अगर कोई मेरे विचारों से सहमत नहीं है तो उसका विरोध कर सकता है, लेकिन किसी की अभिव्यक्ति की आजादी छीनना सही नहीं है।"

 

'मैं राजनीति नहीं  करने आई'
तसलीमा नसरीन ने स्पष्ट किया कि उनकी कोलकाता यात्रा का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वह केवल महिलाओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में अपनी बात रखने आई हैं। उन्होंने कहा, "मैं किसी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं आई हूं। मैं यहां महिलाओं की आजादी और स्वतंत्र अभिव्यक्ति की बात करने आई हूं।" भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर बोलते हुए तसलीमा नसरीन ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बने रहने चाहिए। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भारत की भूमिका को याद करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग उस सहयोग को हमेशा याद रखते हैं।  हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कट्टरपंथी और पाकिस्तान समर्थक तत्व भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते हैं।

 

सुरक्षा व्यवस्था के लिए जताया आभार
तसलीमा नसरीन ने कोलकाता में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने पर राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी लेखक की सुरक्षा केवल उस व्यक्ति की सुरक्षा नहीं होती, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी रक्षा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उन्होंने कोलकाता में स्थायी रूप से रहने को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। तसलीमा नसरीन वर्ष 1994 से निर्वासन का जीवन जी रही हैं। विवादित लेखन और कट्टरपंथियों के विरोध के कारण उन्हें बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने कई देशों में समय बिताया और लंबे समय तक भारत में भी रहीं।
 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!