बांग्लादेश की आजादी के विरोध पर जमात-ए-इस्लामी ने क्यों नहीं मांगी माफी? नई किताब में खुला राज

Edited By Updated: 19 Sep, 2026 10:50 AM

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किताब के अनुसार, 1971 की भूमिका पर माफी का सवाल पहली बार 1994 में गंभीरता से उठा। उस समय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन जमात प्रमुख गुलाम आजम की बांग्लादेशी नागरिकता बहाल हुई थी।

नई दिल्ली। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम यानी 1971 में अपनी भूमिका को लेकर जमात-ए-इस्लामी की ओर से अब तक औपचारिक माफी नहीं मांगे जाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। अब पार्टी के पूर्व सहायक महासचिव अब्दुर रज्जाक की मरणोपरांत प्रकाशित किताब ‘Bangladesh Jamaat-e-Islami: Its History and Politics’ में इस मुद्दे से जुड़े कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। किताब में बताया गया है कि पार्टी के भीतर कई बार 1971 की भूमिका पर माफी मांगने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार आंतरिक विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।

रज्जाक 2003 से 2019 तक जमात-ए-इस्लामी के सहायक महासचिव रहे थे। उन्होंने 2019 में पार्टी छोड़ दी थी। मई 2025 में उनके निधन के बाद उनकी यह किताब प्रकाशित हुई है। इसमें उन्होंने दो दशक से ज्यादा समय तक पार्टी नेतृत्व के भीतर माफी के मुद्दे पर चली बहस और तैयार किए गए कई ड्राफ्ट का जिक्र किया है।

1994 में पहली बार उठा माफी का मुद्दा

किताब के अनुसार, 1971 की भूमिका पर माफी का सवाल पहली बार 1994 में गंभीरता से उठा। उस समय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन जमात प्रमुख गुलाम आजम की बांग्लादेशी नागरिकता बहाल हुई थी। रज्जाक के मुताबिक, गुलाम आजम के सार्वजनिक भाषण के लिए एक समिति ने सुझाव दिया था कि उन्हें 1971 में जमात की भूमिका का भी जिक्र करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। उनका मानना था कि अगर मजबूत स्थिति से माफी मांगी जाती है तो इसे गंभीरता से लिया जाता और पार्टी की भूमिका को लेकर चल रही आलोचना का अंत हो सकता था। हालांकि, अंतिम वक्तव्य में गुलाम आजम ने 1971 की भूमिका का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया। उन्होंने केवल इतना कहा था कि अगर अतीत में उनसे कोई गलती हुई है तो उन्हें माफ कर दिया जाए। रज्जाक के अनुसार, यह बयान मीडिया में ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सका।

2001 के बाद फिर शुरू हुई कोशिश

रज्जाक ने 2001 के चुनाव के बाद एक बार फिर पार्टी नेतृत्व के सामने यह मुद्दा उठाया। उनका प्रयास था कि 16 दिसंबर यानी विजय दिवस से पहले पार्टी 1971 में अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट बयान जारी करे। इसके बाद एक समिति बनाई गई और कई दौर की चर्चा हुई। रज्जाक के अनुसार, माफी के बयान के करीब सात ड्राफ्ट तैयार किए गए। लेकिन तत्कालीन अमीर मतीउर रहमान निजामी के स्तर पर मामला आगे नहीं बढ़ सका। पार्टी के भीतर माफी के विरोध में अलग-अलग तर्क दिए गए। कुछ नेताओं का कहना था कि जमात ने पाकिस्तान की एकता का समर्थन किया था और इसमें कुछ गलत नहीं था। कुछ का तर्क था कि उस समय भारत के प्रभाव को लेकर आशंका थी। वहीं कुछ नेताओं ने कहा कि अगर जमात माफी भी मांगती है तो अवामी लीग और उसके सहयोगी इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

'माफी मांगी तो पाकिस्तान नाराज हो जाएगा'

रज्जाक ने किताब में पार्टी के भीतर हुई बहस के दौरान सामने आए कुछ बयानों का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक, एक पूर्व सांसद ने कहा था कि अगर जमात माफी मांगती है तो पाकिस्तान नाराज हो जाएगा। एक अन्य नेता ने इस मुद्दे पर पार्टी की कार्यसमिति में चर्चा को समय की बर्बादी बताया था। इन प्रतिक्रियाओं से रज्जाक को यह महसूस हुआ कि पार्टी नेतृत्व 1971 के मुद्दे पर स्पष्ट फैसला लेने से लगातार बच रहा था।

2016 में तैयार हुआ माफी का ड्राफ्ट

नवंबर 2016 में रज्जाक ने पार्टी के अमीर को एक पत्र लिखकर 1971 की भूमिका पर स्पष्ट बयान जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने इसके साथ माफी का एक ड्राफ्ट भी भेजा था। इस ड्राफ्ट में कहा गया था कि 1971 में जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता का विरोध किया था और इसके लिए वह बांग्लादेश की जनता से माफी मांगती है। इसमें यह भी कहा गया था कि पार्टी को उस समय पाकिस्तानी सेना की सैन्य कार्रवाई का विरोध करना चाहिए था। हालांकि, ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि जमात खुद को युद्ध अपराधों या मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल नहीं मानती। अंततः यह प्रस्ताव भी पार्टी की मंजूरी हासिल नहीं कर सका।

2019 में रज्जाक ने छोड़ी पार्टी

रज्जाक के अनुसार, 2018 के चुनाव के बाद पार्टी के भीतर 1971 के मुद्दे और संगठन के भविष्य को लेकर फिर चर्चा हुई। कुछ स्तरों पर पार्टी को खत्म कर नया राजनीतिक संगठन बनाने और 1971 के मुद्दे को संबोधित करने तक की चर्चा हुई, लेकिन बाद में नेतृत्व ने अपना रुख बदल दिया। इसके बाद रज्जाक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपनी किताब में लिखा कि 1971 में जमात की भूमिका पार्टी के लिए अब भी एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है।

किताब के लॉन्च पर भी उठा 1971 का मुद्दा

अब्दुर रज्जाक की किताब के लॉन्च कार्यक्रम में भी जमात की 1971 की भूमिका और माफी के सवाल पर चर्चा हुई। बांग्लादेश के कानून मंत्री एमडी असदुज्जमान ने कहा कि अगर 2016 में रज्जाक द्वारा तैयार किया गया बयान स्वीकार कर लिया जाता तो जमात की 1971 की भूमिका को लेकर कई सवालों का समाधान हो सकता था। किताब में रज्जाक ने जमात के भीतर 1971 को लेकर लंबे समय तक चली बहस को दर्ज किया है। उनका विवरण मुख्य रूप से पार्टी के अंदर माफी के प्रयासों और उन्हें रोकने वाले मतभेदों पर केंद्रित है। 1971 की ऐतिहासिक भूमिका और उससे जुड़े युद्ध अपराधों को लेकर बांग्लादेश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवाद भी रहे हैं।

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