Edited By Pardeep,Updated: 12 Sep, 2026 11:47 PM

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक हुई। सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत यात्रा पर आए राष्ट्रपति जिनपिंग और पीएम मोदी की...
नई दिल्ली: दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक हुई। सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत यात्रा पर आए राष्ट्रपति जिनपिंग और पीएम मोदी की इस मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों के आयाम बदलते नजर आ रहे हैं। शिखर सम्मेलन के पहले दिन जहां पीएम मोदी की मुलाकात रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई थी, वहीं दूसरे दिन दुनिया की नजरें मोदी-जिनपिंग वार्ता पर टिकी रहीं।
दोनों देशों के बीच इन 7 प्रमुख बिंदुओं पर बनी सहमति
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, द्विपक्षीय बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है:
- भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखा जाएगा।
- दोनों देशों के मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने दिया जाएगा।
- सीमा विवाद का निष्पक्ष और स्वीकार्य समाधान तलाशा जाएगा।
- व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाया जाएगा।
- दोनों देशों के लोगों के बीच आवाजाही को बढ़ावा दिया जाएगा।
- आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं का समाधान निकाला जाएगा।
- क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर आपसी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
सीमा पर शांति ही संबंधों की मुख्य बुनियाद: पीएम मोदी
भारत मंडपम में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल मौजूद थे, जबकि राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ चीन का वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल शामिल रहा। बैठक के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य और सकारात्मक विकास की बुनियाद है। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा समझौतों और सहमतियों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया।
बैठक की मुख्य बातें
- चौथी भारत यात्रा: प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में राष्ट्रपति जिनपिंग की यह चौथी भारत यात्रा है। इससे पहले वे 2014 में अहमदाबाद, 2016 में गोवा और 2019 में महाबलीपुरम आए थे। हालांकि, इसके बाद 2017 के डोकलाम और 2020 के गलवान संघर्ष के कारण दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया था।
- सांस्कृतिक संदेश: मुलाकात के दौरान पृष्ठभूमि में रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर के भव्य गलियारे की तस्वीर लगाई गई थी। इसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्लोबल साउथ की उभरती ताकत के प्रतीक के रूप में देखा गया।
- आतंकवाद पर कड़ा संदेश: ब्रिक्स घोषणा पत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई और आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस', आतंकी फंडिंग पर रोक तथा दोहरे मानदंडों को खारिज करने की बात कही गई। विशेषज्ञों के अनुसार, घोषणा पत्र में पाकिस्तान का नाम सीधे शामिल न होने के बावजूद इसे चीन के रुख में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
रिश्तों के सामने अभी भी दो बड़ी चुनौतियां
सकारात्मक माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच दो मुख्य मुद्दे बरकरार हैं:
- एलएसी (LAC) पर स्थायी शांति: भारत का रुख स्पष्ट है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति स्थापित हुए बिना संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकते।
- व्यापार असंतुलन: भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार घाटा एक बड़ी चिंता है, क्योंकि भारत का चीन से आयात उसके निर्यात की तुलना में कई गुना अधिक है। इसके अलावा, क्वाड (Quad) में भारत की भागीदारी और पाकिस्तान को लेकर चीन का रवैया भी अविश्वास की वजह बना हुआ है।
यह मुलाकात "हिंदी-चीनी भाई-भाई" के पुराने नारों से इतर व्यावहारिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा वाले एक नए दौर की ओर बढ़ने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।